ब्यूरो रिपोर्ट(एमडी न्यूज़)
महराजगंज/कोठीभार/निचलौल। जिले के कोठीभार और निचलौल थाना क्षेत्रों में संचालित कुछ होटलों में कथित अवैध एवं अनैतिक गतिविधियों को लेकर खबर प्रकाशित करने वाले एक स्थानीय पत्रकार ने खुद को और अपने परिवार को लगातार धमकियां मिलने का आरोप लगाया है। पत्रकार का कहना है कि खबर प्रकाशित होने के बाद से ही दबंग और अराजक तत्वों द्वारा फोन समेत अन्य माध्यमों से डराया-धमकाया जा रहा है। इससे पत्रकार का परिवार भी दहशत में है।
खबर के बाद शुरू हुआ कथित धमकी का सिलसिला
बताया गया कि पत्रकार ने निचलौल थाना क्षेत्र के कुछ होटल और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर चल रहे अवैध एवं अनैतिक कारोबार को लेकर खबर प्रकाशित की थी। पत्रकार के मुताबिक, खबर सामने आने के बाद संबंधित लोगों की ओर से उसे लगातार दबाव में लेने और धमकाने का प्रयास किया गया।
पत्रकार का कहना है कि उसने अपनी खबर में यह भी स्पष्ट किया था कि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उसे कथित तौर पर बार-बार प्रताड़ित और धमकाया जा रहा है।
स्थानीय थाने में दी सुरक्षा की गुहार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार ने अपने मूल निवास क्षेत्र के कोठीभार थाने पहुंचकर थानाध्यक्ष से मुलाकात की और व्हाट्सएप के माध्यम से लिखित तहरीर देकर अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई। तहरीर में पत्रकार ने अपने सूत्रों के आधार पर दो होटल संचालकों के नाम भी दिए थे।
पत्रकार के अनुसार, थानाध्यक्ष ने तहरीर देखने के बाद संबंधित दोनों होटल संचालकों को बुलाकर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया था।
‘मेरी मौजूदगी या सूचना के बिना ही मामला निपटा दिया गया’
पत्रकार का आरोप है कि बाद में होटल संचालकों को थाने बुलाया गया, लेकिन उसे न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उसकी मौजूदगी में कोई कार्रवाई हुई। पत्रकार ने आरोप लगाया कि पूरे मामले को कथित तौर पर अंदरखाने निपटाने का प्रयास किया गया।
अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस से स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास करने पर पत्रकार को कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया गया कि मामला निचलौल थाने का है और वहीं तहरीर दी जाए।
‘जान का खतरा हो तो स्थानीय थाने में सूचना दें या कहीं और?’
पुलिस के इस कथित रवैये पर पत्रकार ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक या पत्रकार को अपनी जान-माल का खतरा महसूस होता है, तो वह सबसे पहले अपने स्थानीय थाने को ही सूचना देगा। ऐसे में उसे दूसरे थाना क्षेत्र में जाने की सलाह देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना कितना उचित है?
पत्रकार का कहना है कि धमकियों के कारण उसका पूरा परिवार मानसिक दबाव में है। उसकी मां का इलाज भी चल रहा है, ऐसे में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
‘मुझे या परिवार को कुछ हुआ तो जिम्मेदारी पुलिस की होगी’
पत्रकार ने चेतावनी दी है कि यदि उसके या उसके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पत्रकार ने यह भी कहा कि यदि उसकी सुरक्षा को लेकर तत्काल गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो वह थाने के सामने धरना/विरोध करने को मजबूर होगा।
फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पत्रकार द्वारा दी गई तहरीर, कथित धमकियों और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर पत्रकार और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए।
