“माहेश्वरी साहित्यकार मंच”का वार्षिकोत्सव फेसबुक के माध्यम से धूमधाम से मनाया गया। जिसमे देश के विभिन्न प्रांतों से करीब 60 साहित्यकार जुड़े । प्रत्येक कार्यक्रम की भांति वार्षिकोत्सव भी विषय पर आधारित ही रखा गया। जिसका विषय रहा-” साहित्यिक सफर की अनुभूति ,बधाई व शुभकामनाएं ” इस विषय पर सबने जमकर काव्य व गद्य विधा में अपने विचार रखे। माहेश्वरी साहित्यकार मंच के पदाधिकारियों में श्रीमती कलावती कर्वा, श्री सतीश लखोटिया, श्रीमती मधु भूतड़ा ‘अक्षरा’ स्वाति जैसलमेरिया, श्यामसुंदर माहेश्वरी के सुंदर से संबोधन से आगाज हुआ। ढोल के साथ उत्सव प्रारंभ किया गया। बताते चलें कि गत वर्ष सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखते हुए यह मंच लगातार कोई न कोई कार्यक्रम आयोजित करके देश विदेश के माहेश्वरी साहित्यकार को जोड़ने का कार्य करता रहा है।
माहेश्वरी साहित्यकार मंच के मुख्य अतिथि पद को सुशोभित करने वाले रचनाकार- श्री ओम जी बिड़ला,कोटा (लोक सभा स्पीकर) ने अपने लिखित संदेश में कहा-“स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कामना करता हूं माहेश्वरी साहित्यकार मंच सामाजिक परिवर्तनकारी विचारों को जन जन तक पहुचाने में सहायक भूमिका निभाता रहेगा।”

श्री श्याम सोनी,नागपुर (सभापति-अखिल भारतवर्षीय महासभा) ने कहा -” जो लिखा जाता है वह समाज के चिंतन का प्रतिबिंब होता है।”श्री रमेश परतानी,हैदराबाद (आध्यात्मिक एवं प्रबंधन प्रशिक्षक)ने कहा -” माहेश्वरी साहित्यकार मंच एक साथ सक्षम प्रजाति के रूप में अपनी प्रतिभा दिखा रहा है।”श्री केदारमल जी भाला(समाज सेवक एवं अध्यक्ष पद प्रत्याशी-श्री माहेश्वरी समाज, जयपुर )-” साहित्य समाज में आदर्श प्रस्तुत करता है।” श्री संजय माहेश्वरी(निर्वतमान महामंत्री-श्री माहेश्वरी समाज, जयपुर) -” साहित्यकार समाज की अनमोल धरोहर हैं। ” श्री शरद गोपीदास जी बागड़ी, नागपुर (अंतर्राष्ट्रीय ख्यातनाम साहित्यकार, समाजसेवी) – “हमारा माहेश्वरी समाज अद्भुत प्रतिभाओं से संपन्न है। ” श्री पुष्कर बाहेती,उज्जैन (प्रधान सम्पादक – श्री माहेश्वरी टाइम्स ने कहा -“किसी भी समाज की समृद्धि केवल धन से नहीं बल्कि उसकी साहित्यिक गतिविधि से आंकी जाती है।”श्री शिव रतन मोहता,जयपुर (प्रधान सम्पादक – उत्कंठा पत्रिका) ने कहा-” साहित्य साधना के इस महायज्ञ में जन जन को प्रेरित करना प्रेरक व प्रशंसनीय है।”श्री आशीष मंत्री, (गणगौर बेसन) (अध्यक्ष श्री माहेश्वरी नवयुवक मंडल,जयपुर )-” तेजी से बढ़ते पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ते युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की सुंदर सोच रखी” मधु भूतड़ा अक्षरा ने कहा-“हर रचनाकार एक दूसरे को प्रोत्साहित करता है,सीखे और सिखाये के भाव से परिपूर्ण हर सृजनकर्ता अपनी कमियों को सुधारने के लिए तत्पर रहता है।” प्रस्तुति देने वाले रचनाकारों के नाम की सूची- लखनलाल माहेश्वरी,(अजमेर),शशि लाहोटी(कोलकाता)

भगवती बिहानी(नाजिरा) मनीषा राठी (उज्जैन )डॉ. आभा माहेश्वरी,(अलीगढ़)भारती माहेश्वरी (नलखेड़ा )डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी (बदायूं),रेखा लखोटिया (नागपुर),श्वेता धूत(हावड़ा), डॉ. सूरज माहेश्वरी(जोधपुर )किरण कलंत्री(रेणुकूट ),सुमन माहेश्वरी (फरीदाबाद),ज्योति सोनी (नागपुर), नेहा चितलांगिया (मालदा),रंजना बिनानी (गोलाघाट),विष्णु असावा (बदायूं) सुमित मान्धना ‘गौरव'(सूरत),विनोद फाफट (नागपुर),अनिता मंत्री (अमरावती),विनिता काबरा(जयपुर),विनिता मालू’ निर्झर (अजमेर), मुरली लाहोटी (हिंगनघाट),सुनीता मल्ल (आमगांव), अनुभि राठी(रतलाम),राखी बियानी (श्रीरामपुर),छाया राठी (यवतमाल),डॉ. कमला माहेश्वरी (बदायूं),सरला मुंधड़ा (सूरत), गुंजन मोहता(हिंगनघाट),राजश्री जी राठी(अकोला),दीपमाला माहेश्वरी(दिल्ली )पुष्पा बल्दवा (ठाणे),प्रसन्ना राठी(नागपुर),जय बजाज(इंदौर),नीलू मालपाणी (पिपरिया),ज्योत्सना माहेश्वरी (मेरठ),चेतना जागेटिया ‘उजला’ (भीलवाड़ा),सुधा कल्याणी (कोलकाता),सुनीता माहेश्वरी(नासिक),रेखा गुप्ता (कोटा),शीला तापड़िया(नागपुर), कुमकुम काबरा(बरेली),प्रह्लाद चांडक (जयपुर),घनश्याम लाठी (बूंदी),पंकज राठी(हावड़ा),मंजू हरकुट ( मेरठ),संतोष काबरा (भीलवाड़ा),रमेश चंद्र माहेश्वरी ‘राजहंस (बिजनौर),पूजा नबीरा (काटोल),श्रीलाल राठी(जयपुर), सरोज गट्टानी(परभणी),मनोज चाँडक ‘नायाब’ (गुवाहाटी),अरुण कोठारी(चेन्नई),अतुल कासट (भीलवाड़ा)शंकर लाल माहेश्वरी (भीलवाड़ा),रुपा चाँडक (नागपुर),अर्चना लखोटिया (केकड़ी), संगीता दरक (मनसा), किरण अटल ‘आत्मकिरण (नेपाल), गौरव जाजू (जयपुर), उर्मिला तापड़िया(नोखा),मनीषा लाठी (सोनकच्छ) आदि करीब साहित्यकार अलग अलग प्रांत व विश्व से जुड़े और अपने अनुभव साझा किए ।

इस मंच का प्रभाव घर पर बैठी गृहणी साहित्यकार पर अधिक पड़ा है उन्हे पहचान मिली और उनमें आत्मविश्वास प्रबल हुआ है। सतीश लाखोटिया जी ने कहा-” हमे हमारी उपलब्धियां ही महान बनाती हैं।” माहेश्वरी साहित्यकार मंच के संस्थापक श्री मती मधु भूतड़ा ‘अक्षरा’, गुलाबी नगरी जयपुर ,कलावती करवा, कूचबिहार, स्वाति जैसलमेरिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। साथ ही समस्त प्रतिभागियों व अतिथि वर्ग को सम्मान पत्र वितरित कर सम्मानित किया।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी (बरेली मंडल)

One thought on ““माहेश्वरी साहित्यकार मंच “का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न एवं सम्मान पत्र वितरण।”
  1. माहेश्वरी साहित्यकार मंच के सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!