संगठन से जुड़े सभी पदाधिकारी दहेज न लेने देने का संकल्प लें जिनके बेटों की शादी होनी है वह दहेज न लेकर मिसाल बनाएं!
आज हमारी बिरादरी में दहेज चरम सीमा पर है लड़के वाले बुलेट, बुलेरो आदि मांगने को अपना मान सम्मान समझने लगे हैं, इससे हमारे मध्यम और गरीब भाइयों को आर्थिक और मानसिक समस्या का सामना करना पड़ता है, लोग कर्ज में डूब जाते हैं, चिंता में बीमारियों के शिकार हो जाते हैं, अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर पैसा खर्च नहीं कर पाते हैं, समाज में खुद को कमतर समझने लगते हैं!
मेरे प्यारे गद्दी भाइयों सबको बराबरी पर लाने का प्रयास करो किसी को एहसास ए कमतरी का शिकार ना होने दो इससे हमारा समाज तरक्की करेगा!
मेरी बिरादरी के पढ़े-लिखे, संपन्न लोगों से गुजारिश है इस इस्लाही तहरीक में हमारा साथ दें! जो नौजवान नौकरी पा गए हैं संपन्न हैं या पढ़े लिखे हैं वह बिल्कुल दहेज ना लें! और जो लोग नौकरी में हैं या संपन्न हैं वह अपने बच्चों की शादी में बिल्कुल दहेज ना लें!
अपने गरीब बिरादर भाइयों की बेटियों से निकाह करने में गुरेज न करें पहले से आधुनिक (फैशन पसंद) लड़की की तलाश न करें, बल्कि सादगी पसंद लड़कियों को शादी में प्राथमिकता दें, और लड़की वाले भी अच्छे अखलाक के मालिक लड़के को शादी के लिए पसंद करें ताकि बिरादरी से स्वतः दिखावा आदि का चलन खत्म हो जाए!
और बिरादरियों की तरह इस समय हमारी बिरादरी में भी एक और चलन चल गया है, कि पहले लड़की वाले लड़का देखने जाते हैं फिर 6,7 लोग लड़के की तरफ से लड़की देखने जाते हैं, और फिर लड़का लड़की को एक दूसरे को दिखाया जाता है और यह क्रम कई बार चलता है यानी कई लड़की देखने के बाद ही शादी तय हो पाती है, मेरी समझ से यह चलन भी गलत है इसे खत्म करना चाहिए! मजे की बात यह चलन भी पढ़े-लिखे, संपन्न और तथाकथित दीनदारों ने ही शुरू कर दिया है, मेरे संगठन के नौजवान साथियों इसे भी खत्म करो, आगे न बढ़ने दो, लड़कियों की नुमाइश बंद कर दो, शादी के समय स्टेज पर रंग चुंग के दुल्हन की नुमाइश बंद कर दो,अगर मुसलमान हो तो इस्लाम पर अमल करो!
हम मौलवी, हाफिज और उलमा से गुजारिश करते हैं कि उस जोड़े का निकाह बिल्कुल न पढ़ाएं जहां दहेज का प्रदर्शन हो रहा हो यानी दहेज दिया जा रहा हो, कोई निकाह बिना मौलवी साहब के संपन्न नहीं होता फिर आज तक किसी मौलवी ने ऐसे निकाह पढ़ाने से इंकार क्यों नहीं किया? क्योंकि उन्हें भी पैसे का लालच है पैसे वाले लोग उन्हें मोटी फीस देते हैं!
हमने अपनी गद्दी बिरादरी में 90% ऐसे लोगों को देखा है जिनकी शादी पहले अपने समकक्ष परिवार में हो गई थी बाद में वह नौकरी पा गए या संपन्न हो गए तो पहले वाली बीवी को छोड़कर दूसरी शादी कर ली जो कि अति निंदनीय है, हां अगर पहली बीवी संतुष्ट है तो दूसरा निकाह करना गलत नहीं!क्या मौलवी साहब को दूसरा निकाह पढ़ाते वक्त इसकी जानकारी नहीं होती है? और अगर होती है तो वह इस पर प्रश्नचिन्ह क्यों नहीं लगाते और पहली बीवी को दीन के मुताबिक संतुष्ट क्यों नहीं करवाते?
मैं दूसरे निकाह का विरोधी नहीं, बीवियां भी अगर पति संतुष्ट नहीं है या करना चाहता है तो उसे दूसरा निकाह करने की इजाजत दें और संतुष्ट रहें, और पति अपनी सभी बीवियों को संतुष्ट रखें, यही दीन कहता है!
उलमा हजरत से हमारी गुजारिश है इस इस्लाही तहरीक में हमारा साथ दें दहेज और नुमाइश पसंद निकाहों को ना कहें!
मेरे सभी गद्दी भाइयों और ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के साथियों दहेज और दिखावा का पूर्णतया त्याग करो, इस इस्लाही तहरीक में हमारा साथ देने की मेहरबानी करें, दावतों में गरीबों को दावत देना बिल्कुल ना भूलें, खुद को सच्चा मुसलमान साबित करें!
अगर हमारे समाज के सभी पढ़े लिखे और संपन्न लोगों का साथ हमें मिल गया तो हम इस कुरीति को खत्म कर देश में मिसाल बन जाएंगे! इंशा अल्लाह! शेयर करना ना भूलें!
बहुत बहुत शुक्रिया!
लेखक (अपील कर्ता) – आपका मोबीनगाज़ीकस्तवी
एडवोकेट हाई कोर्ट लखनऊ,
सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन!
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