आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय बदायूं के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद के उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल के प्लेटफार्म पर एक दस दिवसीय ऑनलाइन नेशनल लेक्चर सीरीज इन फिजिक्स का आयोजन दिनांक 21 जून से 30 जून 2022 तक किया गया,जिसका समापन 30 जून को हुआ।
समापन समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर रेखा घोरपांडे ने परिषद से जुड़े समस्त पदाधिकारियों एवं शिक्षकों तथा विद्यार्थियों का आह्वान किया। राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा के भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद के समस्त पदाधिकारी देश के कोने कोने में भौतिक विज्ञान की समझ और प्रायोगिक जानकारी हेतु देश के कोने कोने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आधार पर विद्यार्थियों को शिक्षित करने का सामाजिक कार्य तेजी से करें। उन्होंने कहा भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद की अन्य प्रदेशों की समस्त रीजनल काउंसिल उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल की तरह ही अद्भुत ऑनलाइन राष्ट्रीय लेक्चर सीरीज इन फिजिक्स जैसे कार्यक्रम संचालित करके विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान की जानकारी देने का सामाजिक कार्य करें। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद के वाइस प्रेसिडेंट एवं आईआईटी रुड़की से अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एके जैन मैं उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लेक्चर सीरीज की सराहना की तथा इसको देशभर के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी बताया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्बोधन देते हुए प्रख्यात भौतिकविद् एवं उत्तर प्रदेश राजकीय महाविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं पूर्व क्षेत्रीय उच्चशिक्षा अधिकारी बरेली मंडल प्रोफेसर डॉ आरपी यादव ने 10 वर्षीय ऑनलाइन राष्ट्रीय लेक्चर सीरीज की सराहना की और विश्वविद्यालयों द्वारा द्वितीय सेमेस्टर को संचालित किए जाने में इस सीरीज को सहयोगी बताया। यह लेक्चर सीरीज भौतिक विज्ञान के बीएससी द्वितीय सेमेस्टर के छात्र छात्राओं के लिए आयोजित की गई । महाविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एवं लेक्चर सीरीज के आयोजन सचिव डॉ संजीव राठौर कहा कि लेक्चर सीरीज में देश के विभिन्न राज्यों के 2387 छात्र छात्राओं ने अपना पंजीकरण कराया। डॉ राठौर ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आधारित बीएससी द्वितीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम को पूर्ण करने के लिए देश के पाँच राज्यों के 10 विद्वान व्याख्याताओं द्वारा ऑनलाइन बेवेक़्स प्लेटफार्म पर संचालित किया गया तथा प्रत्येक व्याख्यान को यूट्यूब तथा फेसबुक पर भी सीधा प्रसारित किया गया ।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ श्रद्धा गुप्ता ने कहा कि कोविड-19 से उबर रहे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीएससी द्वितीय सेमेस्टर के ऑफलाइन क्लास समय से संचालित न हो पाने की स्थिति में यह ऑनलाइन लेक्चर भौतिक विज्ञान के विद्यर्थियों के लिए वरदान सिध्द हुआ।
समापन समारोह के अवसर पर आईएपीटी की उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल के सेक्रेटरी एवं ऑनलाइन लेक्चर सीरीज के आयोजन सचिव तथा आईआईआईटी प्रयागराज के भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर डॉ अखिलेश तिवारी ने सभी का स्वागत किया। अपने उद्बोधन में आइएपीटी के उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल के अध्यक्ष प्रोफेसर त्यागी ने कहा गर्व की अनुभूति हो रही है कि डीएवी कॉलेज देहरादून से अवकाश प्राप्त एवं आइएपीटी द्वारा आयोजित समस्त परीक्षाओं के मुख्य समन्वयक प्रोफेसर बीपी त्यागी, इविंग क्रिश्चियन कॉलेज प्रयागराज एवं आइएपीटी द्वारा आयोजित नेशनल ग्रैजुएट फिजिक्स एग्जामिनेशन (एनजीपीई) के कोऑर्डिनेटर डॉ अनिल कुमार सिंह,

पंडित ललित मोहन शर्मा कैंपस ऋषिकेश, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टेहरी गढ़वाल की प्रोफेसर सुमिता श्रीवास्तव, डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी, आसाम के प्राध्यापक डॉ गोरी शंकर दास, पीएसआईटी कानपुर की प्राध्यापक डॉ अपर्णा दीक्षित, दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज की प्राध्यापक डॉ शेफाली जैन, दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज की प्राध्यापक डॉ सविता शर्मा, राजकीय महिला महाविद्यालय कुरावली मैनपुरी की प्राध्यापक डॉ नीतू अग्रवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज की प्राध्यापक डॉ प्रज्वलित शिखा, तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के ही कालिंदी कॉलेज की प्राध्यापक डॉ त्रिरंजिता श्रीवास्तव जैसे भौतिक विज्ञान के प्रख्यात व्याख्याताओं के सहयोग से आइएपीटी के उत्तर प्रदेश रीजनल काउंसिल ने ईस लेक्चर सीरीज का आयोजन किया जिसमें देश के लगभग 10 राज्यों के प्रतिभागी छात्र-छात्राए उपलब्ध रहे।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट : आलोक मालपाणी (बरेली मंडल)

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!