
रिपोर्ट अनिल यादव मवई अयोध्या
एम डी न्यूज
रुदौली तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत मां कामाख्या मंदिर शारदीय नवरात्र में आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में नजर आ रहा है। नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा। मां कामाख्या मंदिर में वैसे तो सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में यहां की रौनक देखते ही बनती है। पर्व के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। उनकी आराधना से भक्तों को आत्मबल और आध्यात्मिक शांति की प्रेरणा मिलती है। मां कामाख्या मंदिर के पुजारी इंद्रेश कौशिक ने बताया कि ‘ब्रह्म’ का अर्थ तप और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है। मां ब्रह्मचारिणी अपने शांत स्वरूप और कठोर तपस्या के लिए जानी जाती हैं। उनके एक हाथ में अक्ष माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित है। पुजारी ने बताया कि मां की आराधना भक्तों को धैर्य, संयम और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर अडिग रहने की प्रेरणा
