रिपोर्टर रामानंद सागर

एमडी न्यूज़

उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रहे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में अदालत ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे. इससे ग्राम पंचायतों के दैनिक कार्यों और विकास योजनाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। घंटे तक सुनी गई दलीलें।


इस मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद बुधवार को अपना निर्णय सुनाते हुए पंचायत चुनाव की समयसीमा तय कर दी। अदालत के इस आदेश को प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।अब सभी की नजरें राज्य सरकार और चुनावी तैयारियों पर टिकी हैं. साथ ही कोर्ट ने कहा कि ओबीसी कमीशन अपना काम करता रहेगा और उसके काम में कोई बाधा नहीं आएगी।हालांकि, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आयोग के काम पर निर्भर नहीं करेगी। चुनाव मौजूदा नियमों और ढांचे के तहत ही कराए जाएंगे।

जाने क्या है पूरा मामला


दरअसल प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके तो इसका सबसे बड़ा कारण ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और उससे जुड़ा कानूनी विवाद रहा। राज्य सरकार ने आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन किया था लेकिन रिपोर्ट आने में देरी हुई. इसी बीच मई 2026 में ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो गया।
चुनाव नहीं होने पर सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया. इस फैसले को कई याचिकाओं के जरिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. वहीं अब अदालत ने सुनवाई के दौरान चुनाव में लगातार हो रही देरी पर सवाल उठाए और अब तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

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