
11 साल से बोनस सीलिंग में बढ़ोतरी नहीं, रेलवे कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष
वाराणसी। रेलवे के गैर राजपत्रित कर्मचारियों के बोनस की सीलिंग सीमा में पिछले 11 वर्षों से बढ़ोतरी नहीं किए जाने पर कर्मचारियों में निराशा एवं असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्तमान महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए इस वर्ष बोनस की सीलिंग सीमा में संशोधन किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से कर्मचारियों में हताशा है।
बी.एल.डब्ल्यू. मजदूर संघ के महामंत्री राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि रेलवे के गैर राजपत्रित कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में लगातार पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। रेल संचालन, उत्पादन, रखरखाव एवं यात्री सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में महंगाई और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खाद्य सामग्री, शिक्षा, चिकित्सा, आवास तथा अन्य आवश्यक खर्च लगातार बढ़े हैं। इसके बावजूद बोनस की सीलिंग सीमा को लंबे समय से यथावत रखा जाना कर्मचारियों की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि बोनस कर्मचारियों के लिए केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि वर्षभर किए गए उनके परिश्रम और योगदान की मान्यता भी है। ऐसे में बोनस की सीलिंग सीमा में लंबे समय से कोई संशोधन नहीं होना कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार एवं रेल मंत्रालय से मांग की कि रेलवे के गैर राजपत्रित कर्मचारियों की बोनस सीलिंग सीमा को तत्काल बढ़ाया जाए और इसे वर्तमान महंगाई एवं वेतन संरचना के अनुरूप पुनर्निर्धारित किया जाए। साथ ही भविष्य में बोनस सीलिंग की समय-समय पर समीक्षा कर आवश्यक संशोधन की स्थायी व्यवस्था की जाए।
महामंत्री राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों की जायज मांग पर सरकार को सकारात्मक और शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों में व्याप्त निराशा दूर हो तथा उनका मनोबल और अधिक मजबूत हो।
