एम डी न्यूज (लखीमपुर)
13 से 19 नवंबर तक प्रस्तावित था महायज्ञ, ट्रस्ट विवाद का हवाला देकर फरधान पुलिस ने अनुमति देने से किया इनकार; 18 अक्टूबर को दोनों पक्षों पर शांतिभंग की कार्रवाई के बाद निष्पक्ष व्यवस्था की मांग।
लखीमपुर खीरी। बेहजम क्षेत्र के ग्राम लखनापुर स्थित बालाजी महाराज मंदिर में प्रस्तावित शतचंडी महायज्ञ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महायज्ञ की तैयारियों और प्रचार-प्रसार के बीच अनुमति का मामला अटकने से ग्रामीणों में नाराजगी है। अब ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मंदिर परिसर में होने वाली अन्य गतिविधियों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, पावनानंद फलाहारी बाबा के नेतृत्व में 13 से 19 नवंबर तक शतचंडी महायज्ञ का आयोजन प्रस्तावित था। इसके लिए अनुमति मांगी गई, लेकिन मंदिर के ट्रस्ट से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए फरधान पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आयोजन को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

महायज्ञ की अनुमति नहीं, तो अन्य गतिविधियों पर क्या है नियम?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण महायज्ञ की अनुमति नहीं दी जा रही है, तो मंदिर परिसर में कथित निर्माण कार्य, नवरात्र के दौरान दुर्गा जागरण और मेले जैसे आयोजनों को लेकर भी प्रशासन को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या इन गतिविधियों के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति दी गई थी, तो उसका आधार क्या था? वहीं, यदि न्यायालय के किसी आदेश के कारण धार्मिक आयोजन पर प्रतिबंध है, तो उस आदेश की सीमा और लागू शर्तों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
हालांकि, मंदिर परिसर में निर्माण कार्य और पूर्व में हुए आयोजनों की अनुमति से संबंधित दस्तावेजों तथा न्यायालय के आदेश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में पूरे मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
18 अक्टूबर को दोनों पक्षों पर हुई शांतिभंग की कार्रवाई
महायज्ञ की अनुमति को लेकर बढ़े विवाद के बीच 18 अक्टूबर को पुलिस ने दोनों पक्षों के विरुद्ध शांतिभंग की कार्रवाई की। थानाध्यक्ष निराला तिवारी के अनुसार, मंदिर के ट्रस्ट से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके चलते प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामले में अवनीश सिंह, सत्यम मिश्रा, शुभम मिश्रा, विनीत वर्मा और अमित वर्मा समेत अन्य ग्रामीणों के विरोध की बात सामने आई है। विवाद के चलते अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
ग्रामीणों ने मांगा स्पष्ट और निष्पक्ष जवाब
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करे और यह बताए कि मंदिर परिसर में विभिन्न गतिविधियों को लेकर कौन-से नियम लागू हैं। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन निर्णय लेते समय सभी पक्षों के लिए समान नियमों और पारदर्शिता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन न्यायालय में लंबित मामले और लागू प्रतिबंधों की स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या मंदिर परिसर में होने वाली अन्य गतिविधियों के संबंध में भी तथ्य सामने रखे जाएंगे? फिलहाल, शतचंडी महायज्ञ की अनुमति को लेकर विवाद बना हुआ है और ग्रामीणों को प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
