रिपोर्ट-विजय कुमार



गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी। किसानों और वाहन मालिकों के भरोसे से जुड़े स्पेयर पार्ट्स कारोबार में गोला नगर से एक अहम मामला सामने आया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के नाम वाले कथित नकली स्पेयर पार्ट्स की बिक्री की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कंपनी के जांच अधिकारी की शिकायत पर हुई कार्रवाई में चार दुकानों से एयर फिल्टर, डीजल फिल्टर और इंजन सिलेंडर स्लीव समेत कई पार्ट्स बरामद किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, बरामद सामान के नकली होने की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


चार दुकानों तक पहुंची जांच, फिल्टर और इंजन पार्ट्स बरामद


कंपनी में जांच अधिकारी अजय कुमार ने 17 अक्टूबर 2026 को गोला कोतवाली में शिकायत देकर आरोप लगाया कि नगर के बाजार में महिंद्रा कंपनी के नाम वाले कथित नकली स्पेयर पार्ट्स बेचे जा रहे हैं। शिकायत के बाद पुलिस टीम के साथ संबंधित दुकानों की जांच की गई।
शिकायत में दर्ज विवरण के मुताबिक, पंकज मोटर्स से पांच एयर फिल्टर और नौ डीजल फिल्टर बरामद किए गए। पटेल चौराहे के पास स्थित न्यू किसान मशीनरी स्टोर से 11 डीजल फिल्टर मिले, जबकि लखीमपुर रोड स्थित पुरवार ऑटो ट्रेडर्स से 10 डीजल फिल्टर बरामद किए जाने का उल्लेख है।
वहीं, लखीमपुर रोड स्थित बाजपेयी ऑटोमोबाइल्स से एक एयर फिल्टर, चार डीजल फिल्टर और चार इंजन सिलेंडर स्लीव मिलने की बात कही गई है।


बिल नहीं दिखा पाने पर उठे सवाल


कंपनी के जांच अधिकारी का आरोप है कि संबंधित दुकानदार बरामद सामान से जुड़े बिल और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सामान को सील कर नमूने तैयार किए गए और आगे की जांच की प्रक्रिया अपनाई गई।
हालांकि, बिल उपलब्ध न होना अपने आप में किसी उत्पाद के नकली होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। अब अहम सवाल यह है कि बरामद पार्ट्स की तकनीकी जांच में क्या सामने आता है और क्या वे वास्तव में कंपनी के अधिकृत उत्पाद हैं या उनकी नकल किए जाने की पुष्टि होती है।


किसानों और वाहन मालिकों के भरोसे का सवाल


स्पेयर पार्ट्स की वास्तविकता पर सवाल उठने से ग्राहकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। यदि किसी उत्पाद के नकली होने की पुष्टि होती है, तो उससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचने और वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। लेकिन इस मामले में ऐसी किसी क्षति की पुष्टि फिलहाल उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 और 65 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अब विवेचना में बरामद सामान की प्रामाणिकता, उसकी आपूर्ति के स्रोत और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।

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