
भारत-रूस की कला ने भरी रंगोत्सव-2 में संस्कृति की नई उड़ान
डीएवी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कला कार्यशाला शुरू, भारतीय और रूसी कलाकारों ने साझा कैनवास पर उकेरी रचनात्मकता
जालंधर। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को कला के माध्यम से नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से डीएवी यूनिवर्सिटी, जालंधर में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कला कार्यशाला ‘रंगोत्सव-2’ का शुभारंभ हुआ। 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यशाला में दोनों देशों के कलाकारों ने भाग लेकर चित्रकला के जरिए अपनी रचनात्मक प्रतिभा और साझा सांस्कृतिक विरासत को अभिव्यक्त किया।
कलाकार संघ पंजाब (रजि.) और इंटरनेशनल रोरिख मेमोरियल, नगर ने डीएवी यूनिवर्सिटी के सहयोग से यह आयोजन किया। रूस से अन्ना स्मोलिना, एलेना याकोवलेवा, इलमीरा फरीदोनोवा और नादेज्दा कोबज्जिस्तोवा सहित भारतीय कलाकारों ने भी अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
भारतीय प्रतिभागियों में हरीश वर्मा, अंकुश अट्ठी, एच.एस. भट्टी, नवीन ज्योति, डॉ. ममता देवड़ा, दपिंदर, डॉ. ममता राजपूत, प्रियंका सिन्हा, डॉ. परवीन सैनी, योगेश के. प्रजापति, जसवीर राम, राजीव सेमवाल, राजेश रावत, डॉ. रोहिता शर्मा, डॉ. रीना सिंह, वीरेंद्र कुमार, नीतू गौतम और योगेश्वर प्रजापति शामिल रहे।
उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज कुमार ने कलाकारों की कृतियों की सराहना करते हुए कहा कि कला भावनाओं, विचारों और संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन कलाकारों को एक-दूसरे की कला परंपराओं को समझने और आपसी सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यशाला में हरीश वर्मा का विशेष योगदान उल्लेखनीय रहा। भारतीय और रूसी कलाकारों की सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय कला संवाद का मंच प्रदान किया। रंगोत्सव-2 के माध्यम से विभिन्न कला शैलियों, विचारों और सांस्कृतिक अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिला। यह आयोजन कला के जरिए दोनों देशों के बीच मैत्री और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
