
रिपोर्ट आनंद कुमार रिपोर्टर इंचार्ज बाराबंकी
MD न्यूज़
46उर्वरक बिक्री केंद्रों की जांच, 18नमूने लिए गए; निर्धारित दर से अधिक कीमत और खाद की टैगिंग पर होगी कार्रवाई
बाराबंकी। रबी फसलों की बुवाई के बीच किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए गुरुवार को जिलेभर में उर्वरक बिक्री केंद्रों पर छापेमारी की गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने सभी छह तहसीलों में कुल 46 उर्वरक बिक्री केंद्रों की जांच की। इस दौरान 18 नमूने लिए गए, जबकि दो खाद विक्रेताओं के उर्वरक बिक्री प्राधिकार-पत्र निलंबित कर दिए गए।
जांच के दौरान अधिकारियों ने खाद की उपलब्धता, बिक्री दर, स्टॉक और रेट बोर्ड, पीओएस मशीन से बिक्री तथा उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग की स्थिति देखी। तहसील हैदरगढ़ में मेसर्स शिवांश बीज भंडार, सैदनपुर का प्रतिष्ठान जांच के समय बंद मिला। वहीं, तहसील सिरौलीगौसपुर में मेसर्स यादव खाद भंडार, मरकामऊ की दुकान भी बंद पाई गई। दोनों विक्रेताओं के उर्वरक बिक्री प्राधिकार-पत्र निलंबित कर दिए गए।
तहसीलवार कार्रवाई के तहत रामनगर में उप कृषि निदेशक उमेश कुमार के नेतृत्व में छह केंद्रों पर छापे डाले गए। नवाबगंज में जिला कृषि अधिकारी राजित राम की टीम ने 12 केंद्रों की जांच कर 10 नमूने लिए। फतेहपुर में जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार की टीम ने आठ केंद्रों पर छापेमारी की। रामसनेहीघाट में भूमि संरक्षण अधिकारी गोमती सौरभ कुमार की टीम ने पांच केंद्रों की जांच की।
हैदरगढ़ में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक राहुल कुमार की टीम ने सात केंद्रों पर छापे डाले और चार नमूने लिए। सिरौलीगौसपुर में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक देशराज की टीम ने आठ केंद्रों की जांच कर चार नमूने एकत्र किए।
रेट और स्टॉक बोर्ड लगाना अनिवार्य
जिला प्रशासन ने सभी फुटकर उर्वरक विक्रेताओं को दुकानों पर रेट और स्टॉक बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को पीओएस मशीन के माध्यम से निर्धारित मूल्य पर बिना किसी टैगिंग के खाद बेचनी होगी। बिक्री फार्मर रजिस्ट्री और जोत के आधार पर संस्तुत मात्रा के अनुसार करने तथा बिक्री पंजिका में पूरा विवरण अद्यतन रखने को कहा गया है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने, खाद की टैगिंग करने या नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
