उत्तर प्रदेश जनपद बिजनोर

स्योहारा – नगर पालिका परिषद स्योहारा के लिए पहली बार आम आदमी पार्टी के निर्वाचित हुए चेयरमैन शैख़. फ़ैसल वारसी ने आज एक भव्य समारोह में शपथ लेकर पदभार ग्रहण कर लिया। नवनिर्वाचित चेयरमैन फैसल वारसी और नवनिर्वाचित सभी 25 सभासदो को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मांगेराम चौहान ने पद एवं गोपनीयता तथा संविधान के अनुसार कार्य करने की शपथ दिलाई।। इस अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम साहब के भतीजे एपीजे एम हाजा सैयद इब्राहीम के अलावा चौधरी फहीम उर रहमान,शहर के प्रमुख व्यापारी, नेता और सभासदों के परिवारजन, तथा पत्रकारगण मौजूद रहे।
शपथ लेने से पूर्व कुरी हाउस से एक शानदार जुलूस के रूप में फैसल वारसी शपथ समारोह के लिए अपने साथ जीते हुए सभासद के साथ रोड शो करते हुए शपथ ग्रहण स्थान बर्फ फैक्ट्री ठाकुरदुवारा रोड तक अपनेकाफिले केसाथ पहुंचे । रास्ते में कई स्थानों पर उनका स्वागत फूल मालाओं से किया गया और पुष्प वर्षा की गई। शपथग्रहण समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में पहले से लोग मौजूद थे नव निर्वाचित चेयरमैन के वहां पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। एसडीएम महोदय ने पहले चेयरमैन को और फिर सभासदों को उनके पद की शपथ दिलाई और हस्ताक्षर कराकर प्रमाण पत्र जारी किया। इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य मौजूद थे। खचाखच भरे पंडाल में भीषण गर्मी के पश्चात भी लोग मौजूद रहे।
आपको बता दें कि इस बार स्योहारा नगर पालिका की चेयरमैनी में बड़ी क्रांति हुई है पहली बात तो ये कि यूपी में आम आदमी पार्टी की एंट्री को हरी झंडी दिखाते हुए इस पार्टी के चेयरमैन बने हैं। दूसरा बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन ये हुआ है कि यहां जो दो मोहल्लावाद सालो साल से चला आ रहा है वह पहली बार टूट गया है यानि वर्ष 1951 से स्योहारा की जो चेयरमैनी दो खानदानों या दो मोहल्लों मिल्कियान और चौधरियान में चली आ रही थी उसको इस बार विराम लग गया है। फै़सल वारसी ने लगभग 73 साल के बाद यह परंपरा तोड़ दी है। फ़ैसल वारसी पिछले अनेक वर्षों से यहां मेहनत कर रहे थे पिछली बार वह चुनाव हार गए थे लेकिन इस बार स्योहारा की जनता के प्यार ने उन्हें चेयरमैन बना दिया है।

आपको बता दें कि फैसल वारसी ने लोगों से वादा किया है कि वह स्योहारा का वास्तविक विकास करेंगे और आम आदमी पार्टी का जो दिल्ली माडल है उसे स्योहारा में भी लागू करेंगे। नवनिर्वाचित चेयरमैन फैसल वारसी ने शपथ ग्रहण समारोह में स्योहारा की जनता को संबोधित करते हुए बहुत ही जोशीले और भावुक अंदाज में कहा कि मैं स्योहारा की आवाम का बहुत-बहुत दिल की गहराई से शुक्रिया अदा करता हूं मुझे इतनी इज्जत देकर जो उन्होंने मुझ पर एहसान किया है मैं उसे जिंदगी भर नहीं भुला पाऊंगा। आवाम ने मुझ पर जो विश्वास जताकर स्योहारा नगर पालिका परिषद की कुर्सी पर बिठाया है मैं उस पर पूरा पूरा खरा उतरने का प्रयास करूंगा। फैसल वारसी ने स्योहारा की आवाम और सभी नवनिर्वाचित सभासदो से अपील की कि सभी स्योहारा के विकास और उन्नति के लिए आपसी मतभेद भुलाकर विकास कराने में मेरा सहयोग करें आज मैं समस्त स्योहारा की जनता का चेयरमैन हूं। आवाम के लिए बिना भेदभाव के मेरे दरवाजे 24 घंटे खुले हैं। में हर सुख दुख में हर वक़्त स्योहारा की आवाम के साथ खड़ा मिलूंगा।

शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य रूप से अधिशासी अधिकारी नगर पालिका ए.पी पांडे, वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी फहीम उर रहमान, स्योहारा रियासत के कुंवर रनजय प्रताप सिंह, एडवोकेट महफूज़ चौधरी, सरताज बादशाह, एडवोकेट सय्यद जुल्फुकार, डॉक्टर एच.एस कालरा, वरिष्ठ भाजपा नेता मुकेश रस्तौगी, डॉक्टर महमूद अली, खालिद चौधरी, साजिद चौधरी, फैसल वारसी की माता संजीदा चौधरी, पत्नी इरम अंसारी, जुनैद मलिक, एडवोकेट जुनैद हवा, मुजीब चौधरी,अफ़ज़ाल चौधरी,अज़ीम चौधरी, वली रहमान, समीर रहमान, अयाज़ चौधरी, राशिद कुरैशी , शुऐब अंसारी,नईम कुरैशी, कामरान खान, बबलू जैदी, राजपाल प्रजापति, मंसूर चौधरी, राहुल शर्मा , विकास उर्फ मोनू आदि सहित समस्त सभासद तथा हज़ारो लोग शामिल रहे।

बिजनोर से मोहम्मद फैजान की रिपोर्ट

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!