परिवार नियोजन का संदेश देंगे सारथी वाहन और आशा कार्यकर्ता, दूर करेंगे भ्रांतियाँ – सीएमओ।

रोहित सेठ

विश्व जनसंख्या दिवस पर निकाली गई जागरूकता रैली, सारथी वाहन को दिखाई हरी झंडी।

शुरू हुआ जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का सेवा प्रदायगी चरण, 31 जुलाई तक लगेंगे नियत सेवा दिवस कैंप।

सभी आशाएँ कराएं एक-एक पुरुष नसबंदी, बेहद आसान और सुरक्षित प्रक्रिया है एनएसवी।

    वाराणसी। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर वृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर गोष्ठी समेत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने ‘सारथी वाहन’ और रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया। रैली में आशाओं ने “परिवार नियोजन को अपनाओ, जीवन को खुशहाल बनाओ”, “विकसित भारत की नई पहचान, परिवार नियोजन हर दंपत्ति की शान” समेत कई संदेश दिए। 
सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने कहा कि जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का सेवा प्रदायगी चरण शुरू हो गया है। यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। शहरी व ग्रामीण स्तरीय सीएचसी-पीएचसी पर नियत सेवा दिवस कैंप लगाए जाएंगे, जिसमें इच्छुक लाभार्थियों को पुरुष व महिला नसबंदी की सेवाएं दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य विभाग की मजबूत व अहम कड़ी है, जिन्होंने सभी परिस्थितियों और मौसम में बेहतर कार्य किया है। स्वास्थ्य कार्यक्रम चाहे वो टीकाकरण हो या घर-घर जाकर रोगियों को खोजना हो। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि पुरुष नसबंदी (एनएसवी) को लेकर समुदाय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक और करें। महिला नसबंदी की तुलना में बेहद आसान और सुरक्षित प्रक्रिया है। पुरुष नसबंदी कराने पर किसी भी प्रकार समस्या नहीं आती है। समाज में इसकी भ्रांतियों को दूर कर इच्छुक लाभार्थियों और दंपत्ति को प्रेरित करें। सभी आशाएँ अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम एक-एक पुरुष नसबंदी अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या स्थिरता को बढ़ावा देने और प्रजनन दर को कम करने में स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। 
नोडल अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्य ने कहा कि नियत सेवा दिवस ‘नसबंदी’ शिविर अराजीलाइन सीएचसी, सेवापुरी पीएचसी, हरहुआ पीएचसी, चोलापुर सीएचसी, चिरईगांव पीएचसी, गंगापुर सीएचसी, पिंडरा पीएचसी, बडागांव पीएचसी, मिसिरपुर सीएचसी, शहरी सीएचसी शिवपुर, चौकाघाट, काशी विद्यापीठ, दुर्गाकुंड और सारनाथ पर लगाए जाएंगे। इसके लिए छह सर्जन रोस्टर वार तैनात किए गए हैं जो पुरुष व महिला नसबंदी की सेवाएं प्रदान करेंगे। इसके अलावा सभी सरकारी चिकित्सालयों, नगरीय व ग्रामीण सीएचसी-पीएचसी, आयुष्मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, स्वास्थ्य उपकेन्द्रों पर बास्केट ऑफ च्वाइस के माध्यम से परिवार नियोजन के साधन जैसे अंतरा इंजेक्शन, माला एन, छाया, कंडोम, पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी की सेवाएं प्रदान की जाएंगी। परिवार नियोजन किट (कंडोम बॉक्स) में कंडोम, माला एन व आपातकालीन गर्भ निरोधक गोली की उपलब्धता नियमित बनी रहे। 
इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी शेषमणि, एसीएमओ डॉ राजेश प्रसाद, एसीएमओ डॉ निकुंज कुमार वर्मा, डिप्टी सीएमओ डॉ अमित सिंह, डीएचईआईओ हरिवंश यादव, जिला सलाहकार (तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ) डॉ सौरभ प्रताप सिंह, नगरीय स्वास्थ्य समन्वयक आशीष सिंह, सीसीपीएम कौशल चौबे एवं सहयोगी संस्था यूपीटीएसयू, पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधि समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!