बदायूं में जन्माष्टमी के अवसर पर मोरपंखों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए पीपल फॉर एनिमल्स बदायूं संस्था के सदस्यों ने वन विभाग को ज्ञापन सौंपा है। पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने ज्ञापन में लिखा कि मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है। यह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 1 का जीव है। इसे सबसे अधिक संरक्षण प्राप्त है। वन्य जीव के किसी भी अंग का व्यापार करना कानूनी अपराध है। इसके लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। ज्ञापन के दौरान विकेंद्र शर्मा, एडवोकेट कौशल गुप्ता, दीपेश दिवाकर, यश दिवाकर, प्रमोद सिंह और करन दक्ष मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि 16 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का पर्व आ रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रतिरूप को सजाने और मंदिरों में लगाने के लिए लोग मोरपंखों का उपयोग करते हैं। इसके लिए बाजारों में मोर पंखों की बिक्री जोर-शोर से होती है। ज्ञापन में कहा गया कि वन्य जीवों को पालना, कैद करना, मारना या उनके शरीर के किसी भी हिस्से का व्यापार करना अधिनियम की धारा 9 व 51 के तहत कानूनी अपराध है। इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान अधिनियम में दिया गया है।
संस्था ने बताया कि मोर पंखों को बेचने के लिए शासन स्तर से किसी भी प्रकार की अनुमति का प्रावधान नहीं है। मोर पंखों की बिक्री से वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अवहेलना होती है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से मोरपंखों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही बाजारों में दुकानदारों को सूचना देने और मोर पंख बेचे जाने पर कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। अगर कोई भी कहीं मोर पंख बेचता हुआ पाया जाए तो उसके खिलाफ अधिनियम की उचित धाराओं में कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गई है।

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