कानपुर, 30 सितंबर 2025: बिल्हौर तहसील के कानूनगो आलोक दुबे के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद जिलाधिकारी, कानपुर नगर द्वारा की गई कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए बिल्हौर विधानसभा की पूर्व प्रत्याशी रचना सिंह गौतम ने सख्त कदम उठाने की मांग की है। सहायक महानिरीक्षक निबंधन के खुलासे के अनुसार, आलोक दुबे 30 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति के मालिक हैं और विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त व अभिलेखों में हेराफेरी में लिप्त पाए गए हैं।

ग्राम कला का पुरवा, रामपुर भीमसेन निवासी संदीप सिंह की 2 दिसंबर 2024 को की गई शिकायत के आधार पर जांच में पाया गया कि सिंहपुर कठार की गाटा संख्या 207 और रामपुर भीमसेन की गाटा संख्या 895 से संबंधित वाद कोर्ट में लंबित होने के बावजूद, दुबे ने 11 मार्च 2024 को वरासत दर्ज कर उसी दिन बैनामा कराया और 19 अक्टूबर 2024 को गाटा संख्या 207 को एक निजी कंपनी, आरएनजी इंफ्रा, को बेच दिया। जांच समिति ने इसे पद का दुरुपयोग और मिलीभगत माना, जिसके बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 17 फरवरी 2025 को दुबे को निलंबित कर डिमोट किया और लेखपाल के पद पर नियुक्त किया।

रचना सिंह गौतम ने इस कार्रवाई को अधूरा बताते हुए कहा, “जिलाधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाया गया कदम सराहनीय है, लेकिन आलोक दुबे जैसे भ्रष्ट अधिकारी को बिल्हौर तहसील में पुनर्नियुक्त करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के समान है।” उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दुबे के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए, सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाए, और उनकी अवैध संपत्तियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।

गौतम ने कहा, “कानपुर और बिल्हौर को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए यह कदम जरूरी है। जनता का विश्वास तभी कायम रहेगा जब ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त सजा मिलेगी।” स्थानीय निवासियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
साथ में गंगाराम गौतम जीतू लोकेश अवस्थी पंकज भारतीय ऋषभ यादव नीलू पंकज भारती
रिपोर्ट शिवम् यादव

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