थाना मिर्जामुराद पुलिस टीम ने माइक्रो क्रेडिट प्रा0 लि0 के ऑफिस से लूट करने वाले पुराने कर्मचारी अभियुक्त को गिरफ्तार कर नाजायज़ तमंचा, कारतूस, मोटरसाइकिल व अन्य सामान बरामद किया।*
माइक्रो क्रेडिट प्रा0 लि0 कछवा रोड के ऑफिस से बाइक सवार 02 अज्ञात व्यक्तियों ने असलहा दिखाकर आलमारी में रखे ₹26,181/- लूट लिए थे। वादी अकिंत सिंह की तहरीर पर मु0अ0सं0 86/2025 धारा 309(4) बीएनएस व बढ़ोत्तरी धारा 317(2), 317(5) बीएनएस पंजीकृत कर अभियुक्तों की तलाश की जा रही थी।
पुलिस उपायुक्त गोमती ज़ोन द्वारा अभियुक्तों की गिरफ्तारी व सफल अनावरण हेतु पुलिस टीम गठित की गई थी। गठित पुलिस टीम द्वारा सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस व अन्य साक्ष्यों के संकलन की सहायता से प्रकाश में आए अभियुक्त सुमित यादव को दिनांक 03.10.2025 को बेंगलुरु से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर वाराणसी लाकर मा0 न्यायालय भेजा गया था।

*इसी क्रम में आज दिनांक 04.10.2025 को थाना मिर्जामुराद पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर सम्बन्धित प्रकरण में प्रकाश में आए अभियुक्त प्रद्युम्न यादव पुत्र रमाशंकर यादव निवासी ग्राम मन्नीपुर थाना कोईरौना जनपद भदोही, उम्र – 25 वर्ष को गिरफ्तार कर कब्जे से 01 अदद नाजायज़ देशी तमंचा, 01 अदद ज़िन्दा कारतूस (0.312 बोर), घटना में प्रयुक्त 01 अदद मोटरसाइकिल अपाचे (बिना नंबर प्लेट), नगद ₹311/-, 01 अदद आधार कार्ड, 02 अदद एटीएम कार्ड एवं 01 अदद पैन कार्ड बरामद किया गया। अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। जामवन्त उर्फ जमुना यादव की तलाश जारी है।
पूछताछ के दौरान अभियुक्त उपरोक्त ने बताया कि – “मैं, सुमित यादव व जामवन्त उर्फ जमुना यादव – ह मिर्जामुराद से तमंचा दिखाकर ₹26,181/- की लूट की थी। लूट की रकम हम तीनों ने आपस में बाँट ली थी। मेरे हिस्से में ₹2,000/- आए थे, जिसमें से जो बरामद हुआ वही शेष रकम है, बाकी खर्च कर दिया है।” वाहन के बारे में पूछे जाने पर अभियुक्त ने बताया कि – “यह गाड़ी मैंने अपने परिचित से ली थी। इसी गाड़ी से लूट की घटना कारित की थी। जब भी हम लोग कोई घटना करते हैं तो बिना नंबर प्लेट की गाड़ी का प्रयोग करते हैं ताकि पकड़े न जाएं। मेरे साथी सुमित के पकड़े जाने के बाद मैं इस गाड़ी को लेकर बनारस बेचने तथा स्वयं को छिपाने के लिए जा रहा था कि आप लोगों ने पकड़ लिया। तमंचा व कारतूस अपनी सुरक्षा एवं लोगों को डराने-धमकाने के लिए रखता हूं। घटना वाले दिन मैं बैंक के बाहर ही खड़ा था, अंदर इसलिए नहीं गया क्योंकि मैं उस बैंक में पहले काम कर चुका था और वहाँ के कर्मचारी मुझे पहचानते थे
