रिपोर्टर:- विनीत तिवारी
एम डी न्यूज़ (लखीमपुर)

अंबेडकरनगर। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। डिलीवरी के दौरान कथित गलत इलाज के चलते प्रियंका नाम की महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। मामले की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि फर्जी डॉक्टर पिछले पांच वर्षों से अवैध रूप से अस्पताल चला रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी योगेश यादव और शुभम विश्वकर्मा बिना मान्यता और डिग्री के अस्पताल संचालित कर रहे थे। योगेश यादव केवल स्नातक पास है। उसके पिता सरकारी अस्पताल में वार्डबॉय के पद पर कार्यरत थे, जहां से उसने मरहम-पट्टी और सामान्य उपचार जैसे कार्य सीख लिए थे। इसी अधूरे अनुभव के आधार पर उसने महिला की सिजेरियन सर्जरी कर दी, जो घातक साबित हुई।
वहीं, दूसरा आरोपी शुभम विश्वकर्मा महज इंटरमीडिएट पास बताया जा रहा है। दोनों पर बिना वैध चिकित्सा योग्यता के इलाज करने और लापरवाही बरतने का आरोप है।
घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन ने संबंधित अस्पताल को सील कर दिया है तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिले में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की भी जांच अभियान चलाए जाने की बात कही गई है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी डॉक्टरों के सक्रिय नेटवर्क और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
