जनपद महराजगंज के निचलौल ब्लॉक के ग्रामभेड़िया में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से महाविद्यालय शीला देवी महाविद्यालय भेड़िया(केंद्र/कालेज कोड-359) में धड़ल्ले से सामूहिक नकल करवाने और एकांत कमरे में छात्राओं को अवैध परीक्षा सामग्री के साथ नकल करते हुए वीडियो सामने आया है। जिसमें परीक्षा केंद्र से लेकर विश्वविद्यालय तक के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता नजर आ रही है। वीडियो में सम सेमेस्टर परीक्षा 2024-25 एवं 25-26 के विषम सेमेस्टर परीक्षा में जमकर नकल करवाते हुए देखा जा सकता है।इस बाबत यूनिवर्सिटी में एक बार जनसुनवाई भी डाली गई थी,लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा मोटी रकम कालेज से लेकर मामला मैनेज कर शांत कर दिया गया।

लेकिन 25-26 परीक्षा के 5th सेमेस्टर के परीक्षा में शिक्षाशास्त्र विषय मे नकल का एक और वीडियो सामने आया है। जिसमें छात्राएं खुलेआम मोबाइल और गाइड रखकर लिखती नजर आ रही है। साथ ही विषम सेमेस्टर परीक्षा 2025-26 में दो छात्रों को नकल करते हुए UFM चिन्हित किया था।इसके बाद 02 फरवरी को राजनीति शास्त्र के पेपर में एक छात्र के लिखित उत्तर पुस्तिका के पेज न. 11 से 22 तक का पेज पूर्व से फ़टे होने या फाड़े जाने का मामला आया,जिसमे विश्वविद्यालय द्वारा उक्त कालेज से स्पष्टीकरण मांगा गया, और स्पष्टीकरण न देने या असंतुष्टि होने पर उक्त कालेज को भविष्य में केंद्र न बनाने की भी बात कही गयी।लेकिन ये सिर्फ विश्वविद्यालय द्वारा दिखावा किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार उक्त केंद्र पर केंद्राध्यक्ष परीक्षा के दौरान अनुपस्थित रहते हैं।और खाना पूर्ति हेतु एक दिन उपस्थित हुए और CCTVवीडियो में अपने आपको केंद्र पर उपस्थित होने का दिखाकर रवाना भी हो गए की बात भी सामने आई है।बताते चलें कि केंद्र पर केंद्राध्यक्ष कभी उपस्थित ही नही होते हैं।इसकी जांच होनी चाहिए।

परीक्षा में नकल करवाने हेतु जिस कालेज का बड़ा केंद्र उक्त महाविद्यालय में जाता है वहीं के शिक्षक महाविद्यालय के परीक्षा करवाने और नकल की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले लेते हैं।परीक्षा केंद्र से लेकर नोडल तक के कर्मचारियों की इस बात की भनक है लेकिन सब अपनी जेबें भरने के बाद चुप हो जाते हैं।इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी विश्वविद्यालय उक्त केंद्र पर लगातार मेहरबान रहता है।अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि कहीं न कहीं विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के संबधित अधिकारियों की संलिप्तता भी जाहिर हो रही है। यही तक मामला खत्म नही होता है परीक्षा सम्पन्न होने के बाद ड्यूटी में भी झोल होता है,जिस कालेज का केंद्र 359 केंद्र पर आता है उस कालेज के शिक्षक ड्यूटी करते हैं उन्हीं की ऑनलाइन डयूटी भी भर के यूनिवर्सिटी भुगतान हेतु जाता है।

आपके बता दें जिस महाविद्यालय 359 को विश्वविद्यालय द्वारा आंख बंद करके केंद्र बनाया जाता है,वह कई मायने में केंद्र बनने के मानकों को पूरा नही करता है।जैसे- बाउंड्री वाल का न होना, अग्निशमन यंत्र न होना या नवीनीकरण न होना, अनुमोदित शिक्षकों का नवीनीकरण न होना,प्राचार्य के वेतन का बैंक स्टेटमेंट का साक्ष्य न होना,CCTV सभी कमरे में मानक अनुरूप न होना,परीक्षा के समय वॉयस हमेशा बन्द मिलना,ऐसे तमाम तरफ की कमियां और संसाधनों की उपलब्धता न होना है।फिर भी बिना भौतिक निरीक्षण के ही एक नही,दो नही ,तीन नही,कुल चार महाविद्यालयों के केंद्र इस कॉलेज पर भेजा जाता है।

विश्वविद्यालय द्वारा आंख बंद करके चार महाविद्यालयों का केंद्र लगातार एक-दो वर्षों से बनाया जा रहा है,जो कि इस मामले में सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।एक ही केंद्र पर किसी भी महाविद्यालय को एक या एक से अधिक बार केंद्र बनाए जाने पर केंद्र से अन्य महाविद्यालय की साठ गांठ बन जाती है जो नकल को बढ़ावा देता है।विश्वविद्यालय फिर भी है उक्त केंद्र पर है मेहरबान।

जानकारी के नुसार कालेज में परीक्षा में नकल के नाम पर प्रति छात्रों से ₹500 की मोटी रकम भी वसूलकर नकल करवाने का मामला भी सामने आया है। यदि देखा जाय तो इतने सारे मामले और अनियमितताएं आने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा उक्त कालेज पर 4 कालेज के परीक्षा केंद्रों को भेजना एक बहुत बड़ी संलिप्तता जाहिर हो रही है।और सबसे बड़ी बात ये है कि सिर्फ परीक्षा केंद्र बनाने के आवेदन मात्र से ही आंख बंद करके बिना भौतिक निरीक्षण के ही उक्त कालेज को केंद्र बना दिया जा रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या विश्वविद्यालय इन तमाम अनियमिताओं के बाद होने वाले सम सेमेस्टर परीक्षा2025-26 पुनः अपनी ही रवैया अपनाता है या पुनः उक्त महाविद्यालय को केंद्र बनाकर अपनी संलिप्तता जाहिर करता है।फिलहाल ऐसे कई लोगों ने इसकी शिकायत की है और उक्त केंद्र को डिबार करने एवं परीक्षा की सुचिता भंग करने और नकल जैसे गंभीर अपराध में सम्मिलित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही करने की बात कही है।वहीं आगामी परीक्षाओं में महाविद्यालय को केंद्र बनने से रोके जाने की बात कही है ताकि बच्चों का भविष्य खतरे में न पड़ें।

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