बदायूं में सेंट्रल जीएसटी की बड़ी कार्रवाई में समाजवादी पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष रचित गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोप है कि बिना जीएसटी पंजीकरण के गुटखा और पान मसाला बनाने का अवैध कारोबार चल रहा था। जांच में 218 करोड़ 40 लाख रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। इस मामले में रचित गुप्ता समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। छापेमारी के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कई मशीनों से अलग अलग ब्रांड के गुटखा बनते हुए दिखाई रहे हैं। आरोप है कि इस फैक्ट्री में किसी प्रकार का गुटखा बनाकर मार्केट में बेचा जाता था,और मोटी रकम अर्जित की जा रही थी।


सेंट्रल जीएसटी, गौतमबुद्ध नगर की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बदायूं के आवास विकास कॉलोनी स्थित मकान और सराय पिपरिया स्थित फर्म में बिना किसी वैध जीएसटी पंजीकरण के बड़े पैमाने पर गुटखा और पान मसाले का निर्माण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने छापेमारी की तो मौके से 13 एफएफएस मशीनें बरामद हुईं, जिनसे गुटखा और पान मसाले की पैकिंग की जा रही थी।


कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 410 किलोग्राम कटी सुपारी, पान मसाला, गगन, शिखर, गोल्ड मोहर, दिलबाग सहित कई कंपनियों के रैपर और पैकिंग सामग्री बरामद की। जांच में सामने आया कि फरवरी 2026 से जून 2026 तक बिना पंजीकरण के यह कारोबार संचालित किया गया और इसी अवधि में सरकार को 218.40 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान पहुंचाया गया।



सेंट्रल जीएसटी की जांच के बाद सपा के जिला कोषाध्यक्ष रचित गुप्ता, उनके सहयोगी मनोज साहू और उमेश को गिरफ्तार कर मेरठ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारियों की भी जांच की जा रही है।

पूछताछ में आरोपियों ने खुद को केवल मजदूर बताने की कोशिश की, लेकिन जांच एजेंसी ने अदालत में बरामद दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पेश किए। अदालत ने आरोपियों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री पूरी तरह रचित गुप्ता के रसूख के दम पर संचालित हो रही थी और यहां तैयार गुटखा कई ब्रांडों के नाम से अलग-अलग जिलों और राज्यों में सप्लाई किया जाता था।

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