MD न्यूज़ / मोहम्मद अशफाक

गोला गोकर्णनाथ खीरी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, जमुनाबाद में तिलहन फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय मूंगफली उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्राध्यक्ष डॉ. एस. के. विश्वकर्मा ने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ही तिलहन उत्पादन को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसी भी फसल की अधिक उपज के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्र के फसल वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने किसानों को बताया कि तिलहनी फसलें अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता रखती हैं। इसलिए मृदा परीक्षण कराना आवश्यक है, जिससे यह पता चल सके कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और कितनी मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए कैल्शियम एवं सल्फर युक्त उर्वरकों का प्रयोग जरूरी है। इसके लिए बुआई से पूर्व अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 2 क्विंटल जिप्सम खेत में मिलाना चाहिए।
केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद सोहेल ने बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए बीज को पहले उपयुक्त कवकनाशी एवं कीटनाशी से उपचारित करने के बाद पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया) से उपचारित करना चाहिए।
कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. जियालाल गुप्ता ने कहा कि मूंगफली एक नगदी फसल है, इसलिए इसकी नियमित देखभाल आवश्यक है। उन्होंने बताया कि खूंटी बनने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। साथ ही फसल की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए, ताकि कीट एवं रोगों का समय रहते पता लगाकर उनका प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को मूंगफली की उन्नत उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी गई तथा वैज्ञानिकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
