ब्यूरो रिपोर्ट
महराजगंज।उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निचलौल कस्बे से पत्रकार सुरक्षा और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक स्थानीय पत्रकार ने पुलिस कांस्टेबल अशोक यादव पर समाचार संकलन के दौरान अभद्रता और कैमरा बंद होने के बाद कथित तौर पर धमकी देने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और प्रबुद्ध वर्ग ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निचलौल कस्बे में एक वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित पत्रकार तथ्यों की पुष्टि और समाचार संकलन के लिए मौके पर गए थे। पत्रकार का आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में से कांस्टेबल अशोक यादव खबर लिखे जाने की बात से भड़क गए।
आरोप के मुताबिक, जब तक कैमरा चालू था तब तक मामला शांत रहा, लेकिन जैसे ही कैमरा बंद हुआ, कांस्टेबल ने उन्हें कथित रूप से डराना-धमकाना शुरू कर दिया। पत्रकार ने बताया कि घटनास्थल पर अन्य पुलिसकर्मी भी तैनात थे, लेकिन उन्होंने इस व्यवहार पर कोई आपत्ति नहीं जताई। स्थानीय नागरिकों के हस्तक्षेप के कारण स्थिति बिगड़ने से बची।
पूर्व के मामलों को लेकर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता पत्रकार ने कांस्टेबल अशोक यादव पर पूर्व के एक मामले को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, कुछ समय पहले एक पीड़िता को ₹5,000 की कथित ‘मदद’ या ‘दान’ देने के मामले में भी उक्त कांस्टेबल की भूमिका संदिग्ध रही थी, जिसे लेकर क्षेत्र में पहले भी चर्चाएं थीं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
सुरक्षा की गुहार और प्रशासन को चुनौती
पीड़ित पत्रकार ने आशंका जताई है कि उनके खिलाफ कोई झूठी साजिश रची जा सकती है, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच की मांग की है।
मुख्य सवाल: उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार पत्रकारों की सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण के दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि महराजगंज पुलिस प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
