• लेदर सिटी’ कानपुर के विनाश और कॉरपोरेट एकाधिकार के खिलाफ राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बड़ा प्रशासनिक हमला।
  • त्योहारों पर मांस दुकानों की जबरन बंदी को बताया आजीविका के संवैधानिक अधिकारों का हनन; सिंगल विंडो लाइसेंस प्रणाली की मांग।

कानपुर/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गौरव, विशेषकर कानपुर के चमड़ा (Leather) एवं मीट उद्योग के पतन और इससे जुड़े लाखों पारंपरिक कुरैशी व कसाई समाज के आर्थिक उत्पीड़न को लेकर [अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम दर्ज करें] ने शासन-प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कानपुर के जिला अधिकारी (DM) के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय मंत्रालयों को संबोधित एक व्यापक और तीखा संयुक्त ज्ञापन सौंपा है।
इस ज्ञापन में दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पर्यावरण और नियमों की आड़ लेकर उत्तर प्रदेश की पारंपरिक और रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले चमड़ा उद्योग को पूरी तरह ठप कर दिया गया है, जिससे लाखों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

कानपुर का चमड़ा उद्योग तबाह, पड़ोसी देशों को हुआ सीधा फायदा

प्रेस को जारी बयान में राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कड़े आर्थिक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि, “कानपुर का जाजमऊ क्षेत्र कभी पूरे विश्व में ‘लेदर सिटी’ के नाम से विख्यात था और देश को करोड़ों रुपये का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange) कमाकर देता था। परंतु धार्मिक आयोजनों और चुनिंदा पर्यावरण नियमों की आड़ में यहां की टेनरीज (Tanneries) को महीनों तक एकतरफा बंद रखा गया। नतीजा यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा भारत से उठ गया और इस पूरे बाजार पर आज बांग्लादेश, वियतनाम तथा पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है।”

गरीबों का रोजगार छीनकर बड़े कॉरपोरेट घरानों की तिजोरियां भरने का आरोप

ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि पूर्व में राज्य के भीतर हजारों की संख्या में चल रहे स्थानीय और लघु कत्लखानों को बंद कर दिया गया। अब पूरे उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या सिमटकर महज 40 से 50 के बीच रह गई है।
दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अंदरूनी सच्चाई उजागर करते हुए कहा कि, “पारंपरिक और छोटे कुरैशी व्यापारी करोड़ों रुपये की लागत वाले व्यक्तिगत अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP/WTP) लगाने में असमर्थ थे, जिसके कारण उनका काम बंद हो गया। लेकिन दूसरी तरफ, कुछ गिने-चुने बड़े कॉरपोरेट घरानों का इस अरबों रुपये के व्यापार पर एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करा दिया गया। यह नीतियां छोटे व्यापारियों को बर्बाद कर बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।”

त्योहारों पर जबरन बंदी और लाइसेंस के नाम पर भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार

औद्योगिक पतन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले और छोटी दुकानों से पेट पालने वाले फुटकर मांस-मछली व्यापारियों के दर्द को उठाते हुए दल ने कहा कि श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और अन्य त्योहारों के दौरान दुकानों को हफ्तों तक जबरन बंद करा दिया जाता है या ढक दिया जाता है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। इसके अलावा, नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) में फैले भ्रष्टाचार और लालफीताशाही के कारण छोटे दुकानदारों के लाइसेंस का नवीनीकरण (Renewal) होना असंभव हो गया है।

बहुआयामी राजनीतिक दल की ७ सूत्रीय प्रमुख मांगें:

समाचार पत्रों और न्यूज़ पोर्टलों के माध्यम से राजनीतिक दल ने शासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. लेदर इंडस्ट्री के लिए पुनरुद्धार पैकेज: बंद पड़ी कानपुर की पारंपरिक टेनरीज को जीवित करने के लिए सरकार विशेष आर्थिक पैकेज और सामूहिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) लगाने हेतु भारी वित्तीय सब्सिडी दे।
  2. कॉरपोरेट एकाधिकार का खात्मा: मीट एक्सपोर्ट और चमड़ा व्यापार में पारंपरिक लघु उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति बने।
  3. सिंगल विंडो लाइसेंस प्रणाली: नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर एकल खिड़की प्रणाली लागू हो, जिससे छोटे मीट व्यापारियों के लाइसेंस आसानी से और पारदर्शी तरीके से रिन्यू हो सकें।
  4. त्योहारों पर जबरन बंदी का व्यावहारिक विकल्प: त्योहारों के दौरान दुकानों को पूरी तरह बंद करने के बजाय, प्रशासन पारदर्शी पर्दे या काले शीशे जैसे स्वच्छता मानकों के साथ गरिमापूर्ण तरीके से व्यापार जारी रखने की अनुमति दे।
  5. व्यापारियों को पूर्ण सुरक्षा: वैध परमिट के साथ मवेशियों का परिवहन करने वाले व्यापारियों को स्वघोषित गौरक्षकों और स्थानीय पुलिस के अवैध उत्पीड़न से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
  6. आधुनिक सरकारी कत्लखानों का निर्माण: प्रत्येक जिला और नगर निगम स्तर पर सरकार स्वयं स्वच्छ और आधुनिक कत्लखाने बनवाए, ताकि छोटे व्यापारियों को बड़े निजी संयंत्रों पर आश्रित न रहना पड़े।
  7. शैक्षणिक व वैकल्पिक रोजगार सहायता: इस आर्थिक संकट से प्रभावित हुए गरीब मजदूर परिवारों और युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा, ब्याज-मुक्त ऋण (Zero-interest Loans) और वैकल्पिक आजीविका की योजनाएं शुरू की जाएं।

दल का कड़ा संदेश:
ज्ञापन के अंत में [अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम दर्ज करें] के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश शासन ने इन गंभीर आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो उनका दल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े इन गरीब व्यापारियों और मजदूरों के अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण और संवैधानिक रूप से व्यापक आंदोलन करने के लिए विवश होगा।

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