Month: July 2025

खैरीगढ़ सिंगाही सरकारी सीमित केंद्र पर यूरिया खाद के वितरण में उमड़ी भारी भीड़, किसानों में बढ़ी बेचैनी पुलिस बल रहा मौजूद

रिपोट-मक़सूद अलीसिंगाही खीरीएम डी न्यूज़ निघासन तहसील के खैरीगढ़ सिंगाही में स्थित खैरीगढ़ सहकारी समिति केंद्र पर शुक्रवार को यूरिया खाद के वितरण के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जिले…

बाराबंकी:बड़ागांव बासा रोड पर दो अपाचे बाइक की आमने-सामने टक्कर में चार युवक हुए घायल

बाराबंकी जिला ब्यूरो विपिन कुमार की रिपोर्ट बाराबंकी के मसौली थाना क्षेत्र में बड़ागांव बासा रोड पर दो अपाचे बाइक की आमने-सामने टक्कर में चार युवक घायल हो गए। हादसा…

हरदोई जिले में सावन को लेकर SP नीरज जादौन ने किया औचक निरीक्षण

श्रावण मास कावड़ यात्रा को सकुशल एवं शांतिपूर्ण सम्पन्न कराने के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने जनपद हरदोई में थाना पचदेवरा क्षेत्रांतर्गत श्री सिद्धेश्वर नाथ शिव मंदिर बिबियापुर का…

हरदोई जिले के हरियावाँ थाना क्षेत्र का मामला सम्पत्ति को अनाधिकार कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं

राममोहन पिता राकेश मिश्रा निवासी हरियावां पिता के समय से जमीन प्राप्त हुई थी जिसमें गांव के लोग पैतृक सम्पत्ति को अनाधिकार कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं मेरी…

प्रमुख समाजसेवी मनीष चौधरी नेश्रावण मास प्रारंभ पर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक, कर देश में सुख-शांति की कामना

मुजफ्फरनगर।पवित्र श्रावण मास के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रीय सामाजिक संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी मनीष चौधरी आज प्रातः नगर के हृदय स्थल शिव चौक पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धा भाव…

किसानों की आर्थिक उन्नति में बैंकिंग प्रणाली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण-डी0एम0

जिला ब्यूरो विपिन कुमार की रिपोर्ट पंजाब नेशनल बैंक द्वारा आयोजित कृषि आउटरीच कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने की सहभागिता, किसानों को योजनाओं से जुड़ने हेतु किया प्रेरित बाराबंकी,11 जुलाई-:पंजाब नैशनल…

ग्रामीण तबके के युवाओं को गांव में ही मिलेगी डिजिटल लाइब्रेरी की सौगात

जिला ब्यूरो विपिन कुमार की रिपोर्ट ग्राम पंचायत स्तर पर होगी बाल एवं किशोर डिजिटल पुस्तकालय की स्‍थापना जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ डिजिटल पुस्तकालय के सम्बंध में की समीक्षा…

बिहार की वोटबंदी : लोकतंत्र का असली पहरेदार है आम नागरिक… लेखक: उमेश दूबे

रिपोर्ट-रफीउल्लाह खान लोकतंत्र की बुनियाद संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता की भागीदारी पर टिकी होती है। लेकिन जब ये संस्थाएं अपने कर्तव्य से डिग जाती हैं और सत्ता के…

ट्रेन से कटकर पल्लेदार की हुई मौत

जिला ब्यूरो चीफ इमरान क़ाज़ी कालपी/जालौन स्थानीय रेलवे स्टेशन के आसपास ट्रेन से कटकर मौत की घटनाओं के मामले में कमी नहीं हो पा रही है। बीती रात को कालपी…

नलकूप का मोटर फुकनें से 2 मुहल्लों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित, ठीक करने में जुटे जेई

जिला ब्यूरो चीफ इमरान क़ाज़ी कालपी/जालौन वोल्टेज की समस्या की वजह से जल संस्थान का ट्यूबवेल नम्बर -7 रामबाग के फुक जाने से रामचबूतरा सहित दो मुहल्लों की आपूर्ति व्यवस्था…

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!