
काशी में रक्षाबंधन पर सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
50 से अधिक मुस्लिम माताओं-बहनों ने हिंदू भाइयों को बांधी राखी
वाराणसी। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और भाईचारे का अनूठा संदेश देखने को मिला। वाराणसी व्यापार मंडल की ओर से सिगरा स्थित बग्गा निवास में विशेष रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा की पहल और उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में 50 से अधिक मुस्लिम माताओं एवं बहनों ने हिंदू भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
रक्षाबंधन को लेकर मुस्लिम माताओं एवं बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। राखी बांधने के दौरान उन्होंने “इसे समझो ना रेशम की डोर भैया” सहित रक्षाबंधन के अन्य गीत गाए। गीत-संगीत और राखी बांधने के दौरान कार्यक्रम स्थल पर आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहा। बहनों ने देश, समाज और आपसी भाईचारे की रक्षा का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में अजीत सिंह बग्गा, शशांक शेखर त्रिपाठी एडवोकेट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दी बनारस बार एसोसिएशन एवं संयोजक, भाजपा विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र, रविंद्र जायसवाल, संजय निरंकारी, रमेश गुप्ता, शाहिद कुरैशी, खुर्शीदा बानो, मोहम्मद शमशाद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महिला सम्मान एवं महिला सशक्तिकरण पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को परिवार एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी माना गया है। पुरुष और महिला के संबंधों को टकराव के बजाय परस्पर सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से देखने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने भारतीय परंपराओं और सामाजिक दायित्वों की चर्चा करते हुए मनुस्मृति में स्त्री के सम्मान एवं संरक्षण से जुड़े संदर्भों की भी व्याख्या की। साथ ही राहुल गांधी की भारतीय परंपराओं को लेकर की गई कुछ राजनीतिक टिप्पणियों पर असहमति व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं को उनके व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे आयोजन समाज को जोड़ने और विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने का माध्यम हैं। काशी से दिया गया यह संदेश सामाजिक समरसता, महिला सम्मान, भाईचारे और आपसी सद्भाव को और मजबूत करने वाला है।
