जातीय समीकरण नहीं, मुद्दों और विश्वसनीयता के आधार पर लड़ रहा हूं चुनाव : प्रशांत श्रीवास्तव

स्नातक एमएलसी प्रत्याशी ने कहा किसी को हराना उद्देश्य नहीं, मतदाताओं की आवाज सदन तक पहुंचाना प्राथमिकता

वाराणसी। स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के साथ प्रत्याशियों की उम्मीदवारी और चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच कुछ प्रत्याशियों पर किसी विशेष उम्मीदवार के वोटों में सेंध लगाने और उन्हें चुनाव हराने के उद्देश्य से मैदान में उतरने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों को खारिज करते हुए स्नातक एमएलसी प्रत्याशी प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा, नीतियों और स्नातक मतदाताओं के मुद्दों को लेकर है।
प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। किसी प्रत्याशी के चुनाव मैदान में आने से यदि किसी दूसरे के चुनावी समीकरण प्रभावित होते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि वह किसी को हराने के उद्देश्य से चुनाव लड़ रहा है। मतदाता स्वयं तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें किस प्रत्याशी पर भरोसा करना है।
जातीय समीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव को केवल जाति के नजरिये से देखना उचित नहीं है। प्रत्याशी की कार्यशैली, विचारधारा, उपलब्धता और विश्वसनीयता के साथ मतदाताओं के मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी व्यक्ति, समूह या समर्थक से यह नहीं कहा कि उनकी उम्मीदवारी का उद्देश्य किसी अमुक प्रत्याशी को हराना है।
उन्होंने कहा कि वह जातीय आधार पर वोट मांगने के बजाय स्नातक मतदाताओं की वास्तविक समस्याओं को चुनाव का आधार बनाना चाहते हैं। रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बेरोजगार स्नातकों की समस्याओं का समाधान और युवाओं की आवाज को सदन तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि स्नातक एमएलसी का चुनाव केवल राजनीतिक पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षित और जागरूक मतदाताओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर है। उनका प्रयास रहेगा कि चुनाव व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मुद्दों और नीतियों पर केंद्रित हो।
प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी की राजनीतिक भूमिका पर उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में हुए अच्छे कार्यों का वह सम्मान करते हैं। हालांकि, नीतियों या कार्यशैली से असहमति होने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान, विचारधारा और एजेंडे को जनता के सामने रखने का अवसर है।
सार्वजनिक बहस के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी प्रत्याशी तैयार हों तो शिक्षा, रोजगार, युवा और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर खुले मंच पर बहस होनी चाहिए। इससे मतदाताओं को प्रत्याशियों की सोच, प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को समझने का अवसर मिलेगा।
मतदाताओं से अपील करते हुए प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें वोट जातीय समीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि काम, स्पष्ट विचारधारा और स्नातक मतदाताओं के मुद्दों को मजबूती से सदन में उठाने के संकल्प के आधार पर दिया जाए।

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