
डॉ. नेहा गुप्ता की विशेषज्ञ देखरेख में महिलाओं के पेल्विक फ्लोर की समस्याओं का गैर-शल्य उपचार

वाराणसी। पांडेयपुर, काली मंदिर के निकट नई बस्ती स्थित तमन्य फिजियो एंड हेल्थ क्लिनिक में महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रसव के बाद होने वाली विभिन्न शारीरिक समस्याओं के लिए विशेष फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध हैं। वर्ष 2019 से संचालित क्लिनिक में डॉ. नेहा गुप्ता (पीटी), एमपीटी (ऑर्थो) महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पेल्विक फ्लोर पुनर्वास की विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
पेल्विक फ्लोर शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों का समूह है, जो मूत्राशय, गर्भाशय और आंतों को सहारा देने के साथ मूत्र एवं मल नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद, बढ़ती उम्र, लगातार कब्ज, वजन बढ़ने या अन्य कारणों से इन मांसपेशियों में कमजोरी अथवा अधिक खिंचाव की समस्या हो सकती है। इससे महिलाओं को मूत्र रिसाव, बार-बार पेशाब लगना या अचानक पेशाब की तीव्र इच्छा, पेल्विक दर्द, निचले पेट एवं कमर में दर्द, पेल्विक भारीपन तथा गर्भाशय या मूत्राशय के नीचे खिसकने (प्रोलैप्स) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
क्लिनिक में पेल्विक फ्लोर पुनर्वास के तहत केवल व्यायाम कराने के बजाय पहले महिला की समस्या और मांसपेशियों की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार श्वसन प्रशिक्षण, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत या शिथिल करने के अभ्यास, शरीर की मुद्रा में सुधार और कोर मांसपेशियों के पुनर्वास जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
यहां महिलाओं की प्रसव से पहले एवं प्रसव के बाद पुनर्वास, मूत्र रिसाव, गर्भाशय एवं मूत्राशय के प्रोलैप्स, महिलाओं में निचली कमर का दर्द, दांपत्य संबंधों के दौरान होने वाला दर्द तथा डायस्टेसिस रेक्टाई (पेट की मांसपेशियों के बीच दूरी बढ़ना) जैसी समस्याओं के लिए विशेष देखभाल उपलब्ध है।
डॉ. नेहा गुप्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। उन्होंने लंदन से प्रमाणित एंटीनैटल एवं पोस्टनैटल रिहैबिलिटेशन (सी.ए.पी.आर.) प्रशिक्षण प्राप्त किया है तथा वे प्रमाणित पेल्विक फ्लोर रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट भी हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याओं को सामान्य मानकर लंबे समय तक सहते रहने की आवश्यकता नहीं है। उचित जांच, व्यक्तिगत उपचार योजना और पुनर्वास के माध्यम से महिलाओं की दैनिक गतिविधियों एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
