दशकों से हो रहा अंतिम संस्कार, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं श्मशान!
बाजना/मथुरा।
क्षेत्र में एक ऐसा स्थान सामने आया है, बाजना के बिजलीघर के पास स्थानीय लोगों के अनुसार कई दशकों से लगातार शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस स्थान के श्मशान के रूप में सरकारी अभिलेखों में दर्ज होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौके पर पहुंचकर देखा गया कि यहां अंतिम संस्कार के लिए वर्षों से उपयोग किया जा रहा स्थान मौजूद है। स्थानीय लोगों की मौजूदगी और मौके की स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि यह स्थान लंबे समय से अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होता रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पीढ़ियों से इसी स्थान पर क्षेत्र के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है। बावजूद इसके यहां श्मशान के अनुरूप मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है।
मौके पर जर्जर भवन, चारों ओर उगी झाड़ियां, खराब/अव्यवस्थित परिसर और पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं की कमी नजर आती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि यह स्थान दशकों से अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होता आ रहा है, तो इसके विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
सबसे बड़ा सवाल—जमीन का रिकॉर्ड क्या कहता है?
स्थानीय लोगों की बातों के आधार पर यह मामला केवल सुविधाओं का नहीं, बल्कि भूमि के राजस्व अभिलेख और श्मशान के दर्जे का भी है।
यदि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में श्मशान के रूप में दर्ज नहीं है, तो यह पता लगाया जाना जरूरी है कि दशकों से यहां अंतिम संस्कार किस आधार पर होता रहा है और प्रशासन की ओर से इस स्थान को श्मशान के रूप में दर्ज कराने या विकसित करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
वहीं यदि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन श्मशान के रूप में दर्ज है, तो फिर यहां बाउंड्री, साफ-सफाई, रास्ता, प्रकाश और अन्य आवश्यक सुविधाएं क्यों नहीं हैं?


