बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति और मानव तस्करी रोकने के साथ गुमशुदा बच्चों की बरामदगी को लेकर अधिकारियों ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
हाथरस। जनपद में महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की प्रभावी रोकथाम और कार्रवाई को लेकर थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) एवं स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) की मासिक समन्वय गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। शनिवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार कक्ष में आयोजित बैठक में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम, बालश्रम, बाल भिक्षावृत्ति, मानव तस्करी सहित बच्चों से जुड़े विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक का आयोजन पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक एवं नोडल अधिकारी रामानन्द कुशवाह के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी पुलिस लाइन दुष्यंत सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें थाना एएचटी, एसजेपीयू और जनपद के सभी थानों में तैनात बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम पर प्रशिक्षणमासिक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 तथा महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा जारी एसओपी के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।कार्यशाला में बच्चों से संबंधित मामलों में कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए कार्रवाई करने, जांच के दौरान आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर भी चर्चा की गई। साथ ही अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों से बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित कर्मचारियों को अवगत कराया गया।बालश्रम और बाल भिक्षावृत्ति रोकने पर जोरबैठक में बालश्रम और बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम को लेकर विशेष रूप से चर्चा की गई। बच्चों से संबंधित मामलों में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाने, जरूरतमंद बच्चों की पहचान करने तथा संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए।इसके अलावा मानव तस्करी एवं अनैतिक देह व्यापार की रोकथाम तथा बच्चों को ऐसे अपराधों से बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई किए जाने पर भी जोर दिया गया।गुमशुदा बच्चों की बरामदगी और मेडिकल परीक्षण पर चर्चागुमशुदा बालक-बालिकाओं की बरामदगी के बाद की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बरामद बच्चों के चिकित्सीय परीक्षण, आवश्यक बयान तथा बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई।धारा 183 बीएनएस के अंतर्गत बयान तथा किशोर न्याय अधिनियम के निर्धारित प्रारूपों के संबंध में भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जानकारी दी गई। बच्चों से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग एवं सूचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।पीड़ितों की सुरक्षा और संबंधित संस्थाओं से समन्वयबैठक में पीड़िता के चिकित्सीय परीक्षण सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई के संबंध में भी चर्चा की गई। पीड़िता के बरामद होने पर संबंधित पॉक्सो सपोर्ट पर्सन को सूचना देने तथा विधि के विरुद्ध कार्यों में संलिप्त किशोरों से संबंधित मामलों में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए।बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को अपने कर्तव्यों एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा अनुसंधान एवं अभियोजन के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया।हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देशबैठक में बच्चों, महिलाओं एवं आम नागरिकों की सहायता के लिए संचालित विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। इनमें 1098, 1090, 181, 108, 102, 1076, 101, 112 और 1930 प्रमुख हैं। सभी थानों में इन हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग तत्काल संबंधित सहायता प्राप्त कर सकें।विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि रहे मौजूदमासिक समन्वय गोष्ठी में थाना एएचटी, एसजेपीयू, जनपद के सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, एसीएमओ, बीईओ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े सभी विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार के शोषण, बालश्रम, भिक्षावृत्ति और मानव तस्करी की सूचना मिलने पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।रिपोर्ट राजा पाठक

