बरसात में साइकिल फिसलने और कॉपियां भीगने के बाद शहजाद अली ने साथियों संग शुरू किया सड़क सुधारने का काम, जिम्मेदारों की अनदेखी के बीच बच्चों का जज्बा बना मिसाल
धर्मेन्द्र कसौधन(एमडी न्यूज़)
महराजगंज। बदहाल सड़क और बारिश की मुश्किलों के बीच शिक्षा हासिल करने का जुनून किस कदर मजबूत हो सकता है, इसकी मिसाल निचलौल तहसील क्षेत्र के चंदा गूलरभार के छात्र पेश कर रहे हैं। जिस सड़क से होकर बच्चे रोजाना पढ़ने के लिए विद्यालय जाते हैं, उसकी दुर्दशा ने उनकी राह कठिन कर दी है। बरसात में सड़क पर फिसलन और कीचड़ के चलते विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। हालात ऐसे बने कि शहजाद अली की साइकिल बारिश के दौरान फिसलकर गिर गई और उनकी कॉपियां भीग गईं। इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय अपने साथियों के साथ मिलकर सड़क की मरम्मत का बीड़ा उठा लिया।

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। जिम्मेदारों की ओर से अपेक्षित पहल नहीं होने के बीच अब छात्र ही सड़क को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। पढ़ाई के लिए घर से निकलने वाले इन बच्चों के हाथों में किताबों और कलम के साथ सड़क सुधारने का श्रम भी दिखाई दे रहा है।

छात्रों के इस संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण को प्रोत्साहित करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रेश शास्त्री ने शैक्षणिक सामग्री देकर उन्हें उत्साहित किया। बारिश में शहजाद अली की कॉपियां भीगने की जानकारी मिलने पर उन्हें नई कॉपियां दी गईं। साथ ही अन्य विद्यार्थियों को भी शिक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रेरणा देते हुए कॉपियों और मिठाइयों का वितरण किया गया। बच्चों को समझाया गया कि कठिन परिस्थितियां उनकी पढ़ाई में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा किया है। एक ओर शिक्षा को बढ़ावा देने और लोकतंत्र की मजबूती के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ रहा है। सड़क जैसी आवश्यक सुविधा के लिए विद्यार्थियों को खुद श्रम करना पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने विचार करने का विषय है।

शहजाद अली के साथ गोलू कुमार, सैफ अली, मुसाफिर अली, करण चौहान, अखिलेश निषाद, कलाम अली, नितेश मद्धेशिया, वसीम अली, नितेश चौहान और शिवम निषाद सहित अन्य छात्र इस पहल में शामिल रहे।
इन बच्चों की पहल केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शिक्षा के प्रति उनका जज्बा मुश्किल हालात से बड़ा है। अब देखना यह है कि बच्चों की इस मेहनत और ग्रामीणों की शिकायतों के बाद जिम्मेदार विभाग सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए कब कदम उठाते हैं।
