नवरात्रि बाद एसपी शक्ति मोहन अवस्थी के फैसले पर टिकी निगाहें, क्या होगी निष्पक्ष जांच या फाइल फिर ठंडे बस्ते में?
महराजगंज। ठूठीबारी थाने की पुलिस व्यवस्था को लेकर इन दिनों कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। थाने में तैनात आरक्षी बलवंत यादव की लंबे समय से बनी हुई तैनाती और उसकी कथित रूप से विशेष भूमिका को लेकर पुलिस महकमे के भीतर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार बलवंत यादव को थाने में कथित तौर पर ‘कारखास’ की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
सबसे बड़ा सवाल आरक्षी की करीब 10 माह से बनी तैनाती को लेकर है। बताया जा रहा है कि मामला अंतरजनपदीय स्थानांतरण से जुड़ा होने के बावजूद संबंधित आरक्षी अब तक ठूठीबारी में बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किन परिस्थितियों में उसकी तैनाती इतनी लंबी अवधि तक बनी हुई है और क्या इसके पीछे कोई विशेष प्रशासनिक अनुमति है?
‘कप्तान के घर के सामने है मेरी पहुंच’—दावों से बढ़ी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक संबंधित आरक्षी द्वारा कथित तौर पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से करीबी संबंध होने की बातें कही जाती हैं। यहां तक चर्चा है कि वह अधिकारियों के नाम और अपने कथित संपर्कों का हवाला देकर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता है।यदि वास्तव में किसी पुलिसकर्मी द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि उसके पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस महानिदेशक या पुलिस महानिदेशक स्तर तक सीधे संबंध हैं, तो यह सामान्य बात नहीं है। ऐसे दावों की सत्यता सामने आना जरूरी है, क्योंकि किसी कर्मचारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर अपना प्रभाव कायम करना विभागीय अनुशासन और पुलिस की छवि से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
थाना प्रभारी अमित सिंह की भूमिका पर भी सवाल।
पूरे मामले में ठूठीबारी थाना प्रभारी अमित सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि किसी आरक्षी को सामान्य ड्यूटी से इतर कोई विशेष जिम्मेदारी या प्रभावशाली भूमिका प्राप्त है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसकी अनुमति किस स्तर से मिली और थाना प्रभारी की जानकारी में यह व्यवस्था किस आधार पर चल रही है।पुलिस थाने में किसी कर्मचारी की भूमिका नियमों और निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे में यदि ‘कारखास’ जैसी कोई अनौपचारिक व्यवस्था वास्तव में संचालित हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
लोकार्पण के बाद हटाने की चर्चा, फिर क्यों नहीं बदली तस्वीर?
पुलिस सूत्रों से पहले यह जानकारी सामने आई थी कि मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम के बाद संबंधित आरक्षी को ठूठीबारी से हटाए जाने की तैयारी थी। लेकिन समय गुजरने के बाद भी उसकी तैनाती बनी रहने से चर्चाओं का बाजार गर्म है।अब सवाल यह है कि यदि हटाने की तैयारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या स्थानांतरण संबंधी कोई आदेश जारी हुआ था? यदि हुआ था तो उसका अनुपालन क्यों नहीं हुआ? और यदि आदेश नहीं हुआ था तो लंबे समय से तैनाती का आधार क्या है?
नवरात्रि बाद एसपी शक्ति मोहन अवस्थी क्या लेंगे फैसला?
जिले में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के कार्यभार संभालने के बाद पुलिस व्यवस्था को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में ठूठीबारी थाने से जुड़ा यह मामला भी उनके सामने महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल चर्चा में है कि क्या नवरात्रि पर्व के बाद पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाएंगे? क्या लंबे समय से तैनात आरक्षी की तैनाती की समीक्षा होगी? क्या अधिकारियों से करीबी संबंधों के कथित दावों की सत्यता जांची जाएगी?
‘अधिकारी से संबंध’ का दावा सही है तो प्रमाण सामने आएं
पुलिस महकमे में किसी कर्मचारी की पहचान उसके काम और अनुशासन से होनी चाहिए, न कि वरिष्ठ अधिकारियों से कथित नजदीकी के दावों से। यदि बलवंत यादव द्वारा वास्तव में किसी बड़े अधिकारी से सीधे संबंध होने का दावा किया जा रहा है तो पुलिस प्रशासन को इसकी निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।सवाल सिर्फ एक आरक्षी की तैनाती का नहीं, बल्कि पुलिस थाने में नियमों की समानता और अधिकारियों की जवाबदेही का भी है। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ होनी चाहिए और यदि शिकायतों में सच्चाई है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि नवरात्रि के बाद पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं—क्या ठूठीबारी थाने की व्यवस्था की गहन समीक्षा कर सच सामने लाया जाएगा, या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाएगा?
