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जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख – रोहित जैन (दभेड़ी वाले)
मुज़फ्फरनगर
बुढ़ाना, जनपद मुज़फ्फरनगर। कस्बा बुढ़ाना स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड में आज गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और उस पर मिलने वाले ब्याज की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन एवं वी.एम. सिंह पार्टी के तत्वावधान में किसान पंचायत और धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसान मसीहा सरदार वी.एम. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
पंचायत को संबोधित करते हुए सरदार वी.एम. सिंह ने कहा कि किसानों के लिए ब्याज तो दूर, गन्ने का मूल भुगतान भी समय पर नहीं हो पा रहा है। यदि बकाया भुगतान की अवधि और नियमानुसार देय ब्याज का हिसाब लगाया जाए, तो किसानों की बड़ी धनराशि बकाया हो सकती है। उन्होंने किसानों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि अब चुप बैठने का समय नहीं है। किसानों को अपनी आवाज स्वयं बुलंद करनी होगी और अपने हक की लड़ाई मजबूती से लड़नी होगी।

उन्होंने कहा कि किसान जब तक अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक उनकी समस्याओं का समाधान मुश्किल है। किसानों को जाति-बिरादरी और आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी किसान पहचान को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के किसान हितों से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
राजनीतिक नारों को लेकर भी रही चर्चा
किसान पंचायत के दौरान चौधरी चरण सिंह के सम्मान में नारे लगाए जाने और जयंत चौधरी के नाम के जयघोष को लेकर भी चर्चा रही। कार्यक्रम में जयंत चौधरी के समर्थन में जयघोष सुनाई नहीं देने को कुछ लोग राजनीतिक नाराजगी के संकेत के रूप में देख सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आयोजकों या उपस्थित किसानों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने आने की पुष्टि नहीं है।
किसानों की निगाहें भुगतान पर टिकीं
गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और खेती की अगली तैयारी से भी जुड़ा है। ऐसे में किसानों की मांग है कि बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान समय पर कराया जाए और नियमानुसार देय ब्याज भी दिलाया जाए।
बुढ़ाना में आयोजित इस किसान पंचायत के माध्यम से किसानों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया गया। अब देखना होगा कि किसानों की बकाया भुगतान और ब्याज संबंधी मांगों पर संबंधित विभाग एवं शासन स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
