कालाआम बगिया में आयोजित जनसभा में आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली दिखने का दावा, गोपामऊ विधानसभा में बसपा की जमीनी तैयारियों और संगठन की सक्रियता पर उठे सवाल
रिपोर्ट-लालमन
हरदोई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की जमीनी मजबूती और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता परखने के उद्देश्य से कालाआम बगिया में आयोजित बूथ समीक्षा जनसभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा स्थल पर आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली दिखाई दीं। बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की मौजूदगी के बावजूद अपेक्षित भीड़ नजर नहीं आने की तस्वीर ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के नेतृत्व में आयोजित इस जनसभा की जिम्मेदारी गोपामऊ विधानसभा प्रभारी अनिल गौतम के नेतृत्व में संभाली गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं की सक्रियता का आकलन करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी की तैयारियों को धार देना बताया गया।

लेकिन सभा स्थल पर खाली पड़ी कुर्सियों ने आयोजन की तैयारियों और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को जुटाने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए। जिस कार्यक्रम के जरिए संगठन की ताकत और जमीनी पकड़ का संदेश देने की कोशिश थी, वहां भीड़ की स्थिति चर्चा का विषय बन गई।
बूथ मजबूत करने की कवायद, लेकिन भीड़ का सवाल बरकरार
राजनीति में किसी भी दल की असली ताकत उसके बूथ स्तर के संगठन और सक्रिय कार्यकर्ताओं को माना जाता है। ऐसे में बूथ समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर उठने वाले सवाल पार्टी नेतृत्व के लिए अहम हो सकते हैं। हालांकि, खाली कुर्सियों के आधार पर पूरे संगठन की स्थिति का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन यह जरूर सवाल है कि जनसभा के प्रचार-प्रसार और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर कितनी प्रभावी तैयारी की गई थी।
गोपामऊ विधानसभा में संगठन की सक्रियता पर निगाहें
गोपामऊ विधानसभा प्रभारी अनिल गौतम के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर बसपा की संगठनात्मक सक्रियता चर्चा में है। अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, कालाआम बगिया की यह बूथ समीक्षा जनसभा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी और खाली कुर्सियों की तस्वीर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बसपा का स्थानीय संगठन आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अपेक्षित स्तर पर तैयार है, या फिर पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है? एडी न्यूज़ रिपोर्टर लालमन
