आनंद कुमार रिपोर्टर इंचार्ज बाराबंकी


MDNews

खेत में जलने वाली पराली सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि आपकी जमीन की उपजाऊ शक्ति और आने वाले कल की पैदावार को भी जलाकर राख कर देती है?
​आज विकास खंड बंकी के कई गांवों में कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने सीधे खेतों की मेड़ पर पहुंचकर अन्नदाताओं से संवाद किया और एक बेहद अहम संदेश साझा किया।
​विस्तार से पढ़ें पूरी जानकारी
​आज दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को जनपद बाराबंकी के उप कृषि निदेशक श्री उमेश कुमार एवं भूमि संरक्षण अधिकारी (गोमती) श्री सौरभ कुमार द्वारा विकास खंड बंकी के अंतर्गत आने वाले ग्राम गदिया, मलूकपुर, मुबारकपुर, उजिद्दीपुर, असेनी सहित आसपास के क्षेत्रों का सघन भ्रमण किया गया।
​अधिकारियों ने किसानों के बीच रखीं ये मुख्य बातें:
​मिट्टी की सेहत से समझौता नहीं: धान की पराली जलाने से जमीन के भीतर मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेत बंजर होने की कगार पर पहुंच जाते हैं।
​पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा: पराली का धुआं हवा को जहरीला बनाता है, जिसका सबसे पहला शिकार हमारे अपने बच्चे और बुजुर्ग होते हैं।
​आधुनिक यंत्रों का उपयोग: फसल अवशेषों को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों (जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर) और अन्य तकनीकों के जरिए मिट्टी में ही मिलाकर उसे प्राकृतिक खाद बनाएं।
​मुबारकपुर में पराली संग्रहण केंद्र का जायजा:
दौरे के दौरान अधिकारियों ने ग्राम मुबारकपुर में स्थापित पराली संग्रहण केंद्र का औचक निरीक्षण भी किया। वहां फसल अवशेषों के एकत्रीकरण, भंडारण और सुरक्षित प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की गई, ताकि किसानों को अपने खेतों से पराली हटाने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
​एक साझा अपील:
अधिकारियों ने सभी किसान भाइयों से पुरजोर अपील की कि वे एक जिम्मेदार नागरिक और जागरूक अन्नदाता बनें। पराली न जलाकर अपनी मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाएं, पर्यावरण स्वच्छ रखें और अपनी खेती की लागत घटाकर पैदावार बढ़ाएं।
​आइए मिलकर संकल्प लें — “पराली नहीं जलाएंगे, धरती मां का स्वास्थ्य बचाएंगे!”
​

7 views

By MD News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *