पसमांदा मुस्लिमों को न्याय और सच्चर कमेटी की सिफारिशें लागू करे सरकार: बहुआयामी राजनीतिक दल
लखनऊ / नई दिल्ली।
देश के सबसे वंचित और हाशिए पर खड़े पसमांदा (पिछड़ा) मुस्लिम समाज को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक न्याय दिलाने के लिए बहुआयामी राजनीतिक दल राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान डॉक्टर के एम आमिश जी कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करते हुए अपनी मांगों का घोषणापत्र जारी किया है। पार्टी ने महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित विभिन्न संवैधानिक आयोगों को एक विस्तृत मांग पत्र भेजा है।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में निवास करने वाले अल्पसंख्यक समाज में पसमांदा समाज की आबादी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद यह समाज आज भी भयंकर सामाजिक पिछड़ेपन, आर्थिक तंगी और शैक्षणिक शून्यता का सामना कर रहा है।
सरकारी रिपोर्टों का दिया हवाला
पार्टी ने अपने पत्र में विभिन्न सरकारी समितियों और आयोगों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए वर्तमान व्यवस्था पर तीखा हमला बोला:
- सच्चर कमेटी (2006): इस रिपोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मुस्लिम समाज की स्थिति कई मामलों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से भी बदतर है।
- रंगनाथ मिश्र आयोग (2007): इस आयोग ने धार्मिक तटस्थता की वकालत करते हुए पिछड़े मुसलमानों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की थी।
- अन्य समितियां: जस्टिस रोहिणी आयोग, जस्टिस केजी बालकृष्णन आयोग, सामाजिक न्याय समिति और महमूदुर रहमान समिति ने भी पसमांदा समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ठोस सिफारिशें की हैं, जिन्हें लागू नहीं किया गया।
‘पसमांदा कार्ड’ की राजनीतिक साजिश का आरोप
[आपकी पार्टी का नाम] ने आरोप लगाया कि आज एक तरफ राजनीतिक लाभ के लिए ‘पसमांदा कार्ड’ खेलने का ढोंग किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत में इस समाज को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) जैसे ऐतिहासिक व प्रतिष्ठित केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है, जो अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा का मुख्य आधार हैं।
बहुआयामी राजनीतिक दल पार्टी की मुख्य मांगें:

- सच्चर कमेटी का पूर्ण क्रियान्वयन: देश के मुस्लिम अल्पसंख्यकों की बदहाली दूर करने के लिए विशेष विकास पैकेज, शिक्षा और रोजगार में विशेष अवसर तत्काल दिए जाएं।
- अनुच्छेद 341 के तहत SC का दर्जा: रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए संविधान के अनुच्छेद 341 पर लगे धार्मिक प्रतिबंध को हटाया जाए और पिछड़े तबके के पसमांदा मुसलमानों (जैसे- जुलाहा, धुनिया, कूंजड़ा, नट, साईं आदि) को अनुसूचित जाति (SC) का कानूनी दर्जा और आरक्षण का लाभ दिया जाए।
- UPSC में प्रतिनिधित्व में वृद्धि: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में मुस्लिम समाज का चयन वर्तमान में मात्र 2 प्रतिशत के आसपास है। इसे बढ़ाने के लिए पसमांदा छात्रों के लिए विशेष मुफ्त कोचिंग, स्कॉलरशिप और प्रशासनिक अकादमियों की स्थापना हो।
- मुस्लिम बच्चियों की शिक्षा को प्रोत्साहन: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की तर्ज पर नए आवासीय स्कूल खोले जाएं ताकि बच्चियों का ड्रॉप-आउट रेट कम हो सके।
- ग्रामीण बैंकों की स्थापना: छोटे बुनकरों, शिल्पकारों और किसानों को आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर ‘क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक’ (RRBs) खोले जाएं।
- अल्पसंख्यक संस्थानों (AMU व JMI) की सुरक्षा: इन संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे (Minority Status) और स्वायत्तता के साथ किसी भी प्रकार की राजनीतिक छेड़छाड़ तुरंत बंद की जाए।
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पसमांदा समाज को मजबूत किए बिना एक “मजबूत भारत” और “सशक्त संविधान” की कल्पना अधूरी है। यदि सरकार ने इन मांगों पर तुरंत सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो पार्टी इस शोषित समाज की आवाज को उठाने के लिए देशव्यापी आंदोलन करेगी।

