
रिपोर्टर आकाश मिश्र
बहुआयामी समाचार
भीखमपुर (खीरी), 5 नवम्बर 2026। लखीमपुर खीरी जनपद के मितौली क्षेत्र के अंतर्गत भीखमपुर गांव में श्री महालक्ष्मी यज्ञ ज्ञान भक्ति सतसंग समागम में आज पंचम दिवस पंडित पंकज महारथी बर्बटा पुर ने जयंत उद्धार की कथा से भक्तों को भाव विभोर कर दिया।

कथा सुनाते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के द्वारा देवराज इंद्र के पुत्र जयंत को क्षमादान दिया गया। जयंत ने भगवान राम की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कौवे (वायस) का रूप धारण किया था। कौवे के रूप में जयंत ने चित्रकूट में माता सीता के पैरों पर अपनी चोंच से प्रहार कर उन्हें घायल कर दिया था। माता सीता के पैर से रक्त बहता देख भगवान राम अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने पास पड़ी एक घास के तिनके (कुश) को उठाया और उसे ब्रह्मास्त्र के मंत्र से अभिमंत्रित कर कौवे पर छोड़ दिया वह दिव्य तिनका जयंत का पीछा करने लगा। जयंत प्राण बचाने के लिए तीनों लोकों और अपने पिता इंद्र के पास गए, लेकिन भगवान राम के बाण के डर से किसी ने उन्हें शरण नहीं दी। अंत में, नारद मुनि की सलाह पर जयंत वापस लौटकर भगवान राम के चरणों में गिर गए और क्षमा मांगी। शरणागत वत्सल भगवान राम ने जयंत को क्षमा कर दिया, लेकिन क्योंकि ब्रह्मास्त्र निष्फल नहीं जा सकता था, इसलिए राम जी ने जयंत की एक आंख लेकर उनके प्राण छोड़ दिए और उनका उद्धार किया। तभी से यह माना जाता है कि कौवे की एक ही आंख (दृष्टि) होती है। इस मौके पर कमेटी एवं वैदिक मंडल के साथ सैकड़ों की संख्या में भक्त गण उपस्थिति रहे वैदिक मंडल यज्ञाचार्य रोहित बाजपेई, आचार्य राघव मिश्रा, आचार्य मोहित बाजपेई ,आचार्य शोभित तिवारी, आचार्य सतीश मिश्रा ने विधिवत पूजन कराया
इस धार्मिक आयोजन में कमेटी शंकराचार्य मिश्रा, बिदनेश शुक्ला, मुकेश त्रिवेदी, संजय शुक्ला, पंकज मिश्रा, अभिषेक शुक्ला, ओम प्रकाश दीक्षित, आशीष मिश्रा, रामसेवक शर्मा, कृष्ण गोपाल श्रीवास्तव, फत्ते चंद्र शर्मा, सियाराम श्रीवास्तव, कमल बाजपेई, तेज कुमार दीक्षित, हिमांशु मिश्रा, अनुज त्रिवेदी, संत कुमार शुक्ला, श्रीप्रकाश मिश्रा सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण मौजूद रहे।
