एमडी न्यूज राष्ट्रीय शिकायत निवारण अधिकारी- अजीत यादव
गोण्डा- दिवाली पर घरों को रोशन करने के लिए इस बार लोगों का रुझान फिर से मिट्टी के पारंपरिक दीयो की ओर बढ़ रहा है । चीनी लाइटों की बजाय लोग देसी मिट्टी के दिये को प्राथमिकता दे रहे हैं , बाजार में साधारण दीये के साथ रंग-बिरंगे और आकर्षक डिजाइन वाले सजावटी दीयों की भी खूब मांग है ! इससे कुम्हारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है , उन्हें उम्मीद है कि इस बार त्यौहार पर अच्छी बिक्री होगी और उनके पुश्तैनी कारोबार को भी नहीं रफ्तार मिलेगी । दिवाली को देखते हुए कुम्हारों ने करीब दो माह पहले से ही दिए तैयार करने शुरू कर दिए थे । हाथों से तैयार किए जाने वाली दीयों में पारंपरिक कारीगरी के साथ डिजाइन वाले दिए भी देखने को मिल रहे हैं। दुकानदार मोहम्मद सलीम के अनुसार लोगों में मिट्टी के दीयों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। यही वजह है कि बाजार में इलेक्ट्रॉनिक और चीनी लाइटों के विकल्प मौजूद होने के बावजूद पारंपरिक दियों की मांग बनी हुई है। खासकर घरों की सजावट और पूजा के लिए लोग मिट्टी के दीये खरीदना पसंद कर रहे हैं , हस्त निर्मित दीयों से कुम्हारों के पुश्तैनी कारोबार को उम्मीद मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग से कुम्हारों परिवारों के रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद जगी है। शिल्पकारों का कहना है कि मिट्टी को आकार देकर दीया तैयार करने से लेकर इसे सजाने तक काफी मेहनत और समय लगता है । त्यौहार सीजन में अच्छी बिक्री होने से उनके मेहनता उचित फल मिलता है, उनका मानना है कि लोग इसी तरह स्वदेशी और हस्त निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देते रहे, तो आने वाली पीढ़ी भी इस पुश्तैनी कला से जुड़ी रहेगी।



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