एरा विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष ड्र. मोहम्मद फ़हीम खान के द्वारा शिक्षा तकनीकी अनुसंधान व बहुआयामी प्रकाशक के माध्यम से मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश लेने वाले पिछड़े गरीब छात्रों के लिए जो लाखों रुपए देकर भारत की प्रतिष्ठित कोचिंग में दाखिला नहीं ले सकते हैं के लिए बहुत ही निम्न शुल्क पर नीट की पुस्तक प्रकाशित की है
बताते चलें कि पुस्तक का ऑनलाइन इबुक माध्यम मल्टी कलर 3D स्ट्रक्चर डाइमेंशन में रखा गया है जिसमें पॉइंट टू पॉइंट स्टेप बाय स्टेप कांसेप्ट को समझाया गया है प्रत्येक कंसेप्ट के बाद उदाहरण के माध्यम से प्रॉब्लम को सॉल्व करके दिखाया गया है।
डॉक्टर फहीम की टीम में कार्य करने वाले समस्त स्कॉलर्स को यह रसायन विज्ञान की पुस्तक निशुल्क भेंट की गई है।
डॉक्टर फहीम खान को एक लंबे अरसे से मेडिकल व इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाने का विशेष अनुभव प्राप्त है भारत की प्रतिष्ठित परीक्षा सीएसआईआर के तहत जेआरएफ जैसी प्रमुख परीक्षाओं को सफतापूर्वक उत्तीर्ण किया है तथा भारत के प्रख्यात इंस्टिट्यूट सीडीआरआई सेंट्रल ड्रग्स रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ जैसी संस्था से पीएचडी की उपाधि हासिल की है विश्व के विख्यात शिक्षा विधि डॉक्टर कोठारी जैसे मार्गदर्शन में हेलोशिप भी प्राप्त की हुई है


प्राप्त जानकारी सेडॉक्टर फहीम के द्वारा विश्व के विभिन्न शोध जौरनालों में 70 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हैं तथा रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नेचुरल प्रोडक्ट कॉस्मेटिक्स मेडिसिंस फार्मास्युटिकल्स ड्रग डिजाइन तक डिलीवरी ड्रग थेरेपी पर विशेष महारथ हासिल है जिसके चलते डॉक्टर फहीम के द्वारा अनेक छात्रों की पीएचडी स्कॉलर से संचालित है।
डॉक्टर साहब शिक्षा तकनीकी अनुसंधान के प्रति बहुत ही अहम चिंतन मनन की भूमिका रखते हैं और सदैव समाज को शिक्षा के क्षेत्र में जागरूक कराने की कोशिश करते रहते हैं सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर फहीम भारत की प्रतिष्ठित संस्था शिक्षा तकनीकी अनुसंधान के प्रदेश वैज्ञानिक सलाहकार के पद पर भी सुशोभित हैं जो समय समय पर विज्ञान के क्षेत्र में सुझाव प्रेषित करते रहते हैं। और अधिक जानकारी लेने पर सामने निकल कर आ रहा है कि इस पुस्तक को चार भागों में विभाजित किया गया है जिसका प्रथम वॉल्यूम और सेकंड वॉल्यूम संचालित है जो पूर्णता ईबुक फॉरमैट या हार्ड फॉर्मेट में मार्केट में उपलब्ध है अधिक जानकारी के लिए बहुआयामी प्रकाशक मल्टीडाइमेंशनल पब्लिकेशन गूगल में डालकर डॉ मोहम्मद फहीम रसायन विज्ञान के नाम से सर्च किया जा सकता है।
डॉक्टर फहीम के द्वारा किया गया महत्वपूर्ण कार्य के लिए संस्था परिवार उनको धन्यवाद पेश करती है व आशा उम्मीद करती है की सदैव गरीबों पिछड़ों के उत्थान के लिए तत्पर रहेंगे।

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!