रिपोर्ट शाहनूर आलम जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख फतेहपुर

फतेहपुर जिले में पूर्व परंपरा के अनुसार असीराने कर्बला की याद में ‘चुप ताज़िया’ का जुलूस अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। यह जुलूस इमाम हुसैन (अलै०) के 72 साथियों की शहादत और शाम (सीरिया) की कैद से रिहा होकर मदीना पहुंचे अहल-ए-बैत के काफिले की याद में आयोजित किया गया।
सुबह लगभग 7:00 बजे मोहल्ला कजियाना स्थित इमामबारगाह मुख्तार नकवी से शुरू होकर यह जुलूस मुस्लिम चौक और एम.आई.सी. स्कूल से होता हुआ बिंदकी बस स्टॉप स्थित कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लेकर इमाम हुसैन को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।
जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर उलेमाओं और जाकिरीन ने कर्बला के पैगाम को रेखांकित किया:
मौलाना सैय्यद नुसरत हुसैन आबिदी ने आतंकवाद का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इस्लाम में आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है; यह अमन का मजहब है। ताज़िया और आलम यज़ीदी आतंकवाद के खिलाफ एक एहतजाज (विरोध) हैं, ताकि बेगुनाहों का खून बहाने वालों को पहचाना जा सके।
अमीरे महाराष्ट्र हज़रत अल्लामा मौलाना अमीर हमज़ा अशरफ़ी ने कहा कि हजरत हुसैन ने अपने नाना का दीन बचाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने भी अहिंसा का पाठ कर्बला से ही सीखा था।
मौलाना सैय्यद फिरोज हैदर, अमजद साहब और मौलाना मासूम साहब ने इमाम के बलिदान को नमाज और मस्जिदों की बका का जरिया बताया।
एम.आई.सी. मैदान के पास अंजुमने जाफरिया और अब्बासिया ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की, जिससे माहौल ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा। जुलूस का प्रबंध मुतवल्ली सैयय्द कसीम अब्बास नकवी और सै. मो. मुख्तार नकवी (शोऐब) ने किया। इसमें भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी सै. फैज़ान हैदर रिज़वी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में कमेटी ने प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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