Constitutional Democratic Rights of Journalists of India of Multidimensional News.  

बहुआयामी समाचार में भारत के संविधानिक लोकतांत्रिक पत्रकारों के अधिकार।

                Constitutional Democratic Rights of Journalists of India of Multidimensional News.  

1. Right/Freedom of speech and expression (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता/ अधिकार (एक्ट 91,92))

2. Right to receive information (सूचना प्राप्त करने का अधिकार)

3. Right to ask question (प्रश्न पूछने का अधिकार)

4. Right to protest and dissent (विरोध और असहमति जताने का अधिकार)

5. Right to get access to cover every public place (सार्वजनिक स्थलों पर जाने वा कवर का अधिकार)

6. Right not to reveal is news source act (15,2) (समाचार स्रोत प्रकट न करने का अधिकार)

7. Right to cover court proceedings (अदालती कार्यवाही को कवर करने का अधिकार)

8. Right to cover parliamentary proceedings (Protection of Publication act 1977)

(संसदीय कार्यवाही को कवर करने का अधिकार) (प्रकाशन संरक्षण अधिनियम 1977)

9. Right to conduct interview (साक्षात्कार आयोजित करने का अधिकार)

10. Right to advertise (विज्ञापन का अधिकार)

Journalists of multidimensional News cannot cover these places (Official secret act (1923)

Section 3,5) (इन जगहों की बहुआयामी समाचार के पत्रकार नहीं कर सकते कवरेज)

1.सरकार के गुप्त कामों का वीडियो प्रकाशित करना प्रतिबंधित है।

2.किसी भी सेना वायु सेना, जल सेना, थल सेना, से संबंधित वीडियो प्रकाशन पर प्रतिबंध है।

3.रक्षा अनुसंधान और डी.आर.डी., सी.यस.आई.आर प्रयोगशाला वैज्ञानिक कार्य आदि से संबंधित वीडियो का प्रकाशन प्रतिबंधित है।

4.युद्धपोत वायुपुत्र जलपोत आदि की फोटोग्राफी वीडियोग्राफी पूर्णतया प्रतिबंधित है।

5.किसी भी सुरंग य सरकारी आर्म हथियार फैक्ट्री का वीडियो प्रकाशन प्रतिबंधित है।

6.परमाणु बम, हाइड्रोजन बम बनाने की तकनीकी को प्रकाशित करना पूर्णतया प्रतिबंधित है।

नोट:-कोई भी दबंग छवि का अधिकारी, नेता, समाचारपत्र में प्रकाशन से संबंधित दबाव बनाता हो धमकी देता हो फर्जी मुकदमे लगाता हो इसकी शिकायत पी.सी.आई (प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) में सीधे की जा सकती है।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बहुआयामी संस्था की कानून बनाने की सरकार से मांग।

Journalist protection law/act पत्रकार सुरक्षा कानून/ Press council of India act (1978) 15(2)

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया 1978 धारा 15(2) में लिखा है कि किसी पत्रकार भी को खबर के सूत्र की जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कोर्ट के सम्मन देने के बावजूद पत्रकार ना चाहे तो सोर्स ना दें बाध्य नहीं किया जा सकता।

The parliamentary proceeding protection of Publication act (1956)                              

Description: D:\AA M.A. KHAN's DOCUMENTS\signatur in png\shazia khan.pngPRB act press and book registration act (1867)

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!