रिपोर्ट:तबरेज नियाज़ी



जौनपुर:पत्रकार एकता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में एवं प्रदेश मंत्री विशाल सेठ व मंडल अध्यक्ष राजेश गौतम की देखरेख में पत्रकार एकता संघ का 8 वां वार्षिक उत्सव वाजिदपुर चांदमारी स्थित जिला कार्यालय पर बड़े ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें जिले के समस्त पदाधिकारी उपस्थित होकर केक काटकर खुशियां जाहिर किया और एक दूसरे को इस मौके पर बधाइयां दी वहीं समस्त पदाधिकारियों ने पत्रकार एकता संघ की नियम और कानूनों के बारे में बताते हुए कहा कि पत्रकार एकता संघ 23 मई 2016 से संचालित हो रहा है जिसके संस्थापक जुनेद सानी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष केडी सिंह द्वारा कठिन परिश्रम करके आज 8 वर्ष संघ द्वारा पूरा कर लिया गया है जो पत्रकार एकता संघ के लिए एक गौरवपूर्ण बात है।

आज पूरे देश और प्रदेश के जिला कार्यालयों पर बड़े ही धूमधाम से आठवां वार्षिकोत्सव मनाया गया जिसके सापेक्ष आज जिला कार्यालय जौनपुर में भी बड़े धूमधाम से समस्त पदाधिकारियों की उपस्थिति में केक काटकर 8 वा वर्षिकोत्सव मनाया गया संस्था के उच्च पदाधिकारियों द्वारा बताया गया कि पत्रकार साथियों द्वारा प्राकृतिक की हर मौसम को फेश करते हुए खबरों का संकलन करते हैं समाज को न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं अगर उनके कार्यों में किसी भी प्रकार का कोई बाधा बनता है तो ऐसे में हमारी संगठन पत्रकार एकता संघ अपने सभी पत्रकार साथियों के लिए न्याय की लड़ाई पूरे दमखम से लड़ेगी और न्याय दिलाने का कार्य करेगी और समाज में हो रही अन्याय को प्रदर्शित करने में कभी पीछे नहीं रहेगी। इस मौके पर वाराणसी मंडल अध्यक्ष राजेश कुमार गौतम, मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविन्द्र नाथ मिश्रा, मंडल मीडिया प्रभारी राकेश, मंडल सचिव सुजीत कुमार सिंह, मंडल सहसचिव विरेन्द्र कुमार यादव, जिलाध्यक्ष सतीश कुमार चौहान, जिला उपाध्यक्ष विनय कुमार, जिला कोषाध्यक्ष विरेन्द्र कुमार सिंह, जिला सचिव अरुण कुमार सिंह, बृजेश कुमार यादव, जिला वरिष्ठ संगठन मंत्री साहब लाल चौहान, जिला मीडिया प्रभारी तबरेज निया जी, जिला सहसचिव अतुल कुमार शर्मा, सदस्य लाल साहब सिंह रमाशंकर पांडे, जयेश गुप्ता, मड़ियाहूं तहसील अध्यक्ष सिकंदर भारती सहित सैकड़ों पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!