मवई, अयोध्या।
ग्राम पंचायत सुल्तानपुर में विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के तहत कराए जा रहे कार्य में जेसीबी मशीन के इस्तेमाल की तस्वीर सामने आने के बाद योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस कार्य के जरिए ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए, वहां मशीन से नाली और खुदाई का काम कराया जा रहा है।
मौके पर जेसीबी से काम कराए जाने की तस्वीर सामने आने के बाद ग्रामीणों में भी चर्चा तेज है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगारपरक योजना में यदि मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे स्थानीय मजदूरों को मिलने वाले काम पर सीधा असर पड़ता है।
मामले में विकासखंड मवई के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से जानकारी ली गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए एपीओ से जानकारी लेने की बात कही। वहीं एपीओ ने भी कहा कि “इसकी जानकारी मुझे नहीं है।”
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत में योजना के तहत कार्य चल रहा है और मौके पर जेसीबी मशीन दिखाई दे रही है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? क्या कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा था या फिर मशीन के इस्तेमाल की जानकारी अधिकारियों तक पहुंची ही नहीं?
अब पूरे मामले में जांच की मांग उठने लगी है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कार्य के लिए कितने मजदूर स्वीकृत थे, कितने मजदूरों से काम कराया गया और मौके पर जेसीबी का इस्तेमाल किसकी अनुमति से हुआ। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि योजना के तहत मजदूरों को वास्तविक रोजगार मिला या मशीन के जरिए काम कराकर उनके रोजगार के अवसर प्रभावित किए गए।
फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों के “जानकारी नहीं है” वाले जवाब ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और सरकारी रोजगार योजना के कार्य में मशीन के इस्तेमाल की तस्वीर का सच क्या सामने आता है।

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