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विषय: बहुआयामी शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान ऑर्गनाइजेशन व बहुआयामी प्रकाशक के माध्यम से उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जिला ब्यूरो चीफ व पत्रकारों की निशुल्क नियुक्तियां किए जाने के संबंध में।

महोदय/महोदया
भारत की प्रतिष्ठित पंजीकृत संस्था बहुआयामी शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान ऑर्गेनाइजेशन तथा बहुआयामी प्रकाशक के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विशाल जनपद लखीमपुर खीरी में शिक्षक दिवस 5 सितंबर 2021के शुभ अवसर पर बहुआयामी समाचार का विभिन्न प्रख्यात समाजसेवियों की उपस्थिति में न्यूज़ पोर्टल का उद्घाटन किया गया जिसको लेकर संस्था अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संस्था व प्रकाशक उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जिला ब्यूरो चीफ तथा जनपद के प्रत्येक विधानसभा तहसील व ब्लाक स्तर पर पत्रकारों की निशुल्क नियुक्तियां कर रही है
जिसमें संस्था के द्वारा पत्रकारों को नियुक्तिपत्र, प्राधिकारपत्र व आईडी कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिस पर प्रत्येक पत्रकार की यूनीक आईडी नंबर व रिफरेंस नंबर मेंशन किया गया है जिसका आईडी नंबर व रिफरेंस नंबर की जानकारी संबंधित वेबसाइट www.multidpublication.in
पर के ऑप्शन आइडेंटिफिकेशन ऑफ मेंबरशिप से प्राप्त किया जा सकता है साथ ही साथ संबंधित पदाधिकारी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है संस्था के पास प्रत्येक पदाधिकारी के आवश्यक दस्तावेज की छाया प्रति उपस्थित है जानकारी के लिए संस्था में केवल वही साथी सदस्य के योग्य पाए गए हैं जिनका स्नातक पूर्ण हो गया है।


संस्था ने बहुआयामी समाचार के नाम से भारत सरकार के मंत्रालय न्यूज़ रजिस्ट्रार ऑफ इंडिया (RNI) से टाइटल वेरीफिकेशन का प्रोसेस पूर्ण कराते हुए शासन की तरफ से अधिकारीक कार्यालय लखनऊ का व समाचार प्रकाशक प्रमुख का वेरीफिकेशन पूर्ण किया जा चुका है।
बहुआयामी प्रकाशक के पास पत्र-पत्रिका समाचार पत्र प्रकाशन कराने का डीड पर पूर्ण अधिकार रजिस्ट्रार कार्यालय लखनऊ से प्राप्त है।
तथा संस्था bye-laws बायलॉज में बनाए गए उद्देश्य में समाज हित में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पत्र पत्रिका व समाचार प्रकाशन हेतु पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं।
आवश्यकता अनुसार शासन व प्रशासन को आधिकारिक दस्तावेजों की छाया प्रति संस्था व प्रकाशक की ओर से उपलब्ध करवाई जा सकती है
संस्था की ओर से जिला ब्यूरो चीफ को देय माइक आईडी पर ब्यूरो चीफ की नियुक्ति पत्र पर अंकित आईडी नंबर व रिफरेंस नंबर माइक आईडी पर भी अंकित किए गए हैं जिससे सटीक ब्यूरो चीफ की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
संस्था की ओर से देय आईडी नंबर व रिफरेंस नंबर विशेष कोडिंग है जिसको देखते ही जुड़े हुए साथी की संपूर्ण जानकारी बताई जा सकती है।

अतः संस्था व प्रकाशक के माध्यम से श्रीमान जी से निवेदन है की बहुआयामी समाचार के नाम से कोई भी पदाधिकारी यदि अपनी नियुक्ति पत्र,अधिकारपत्र या आईडी कार्ड में से कोई भी एक दस्तावेज मांगे जाने पर उपलब्ध कराने में सक्षम है तो उसको संस्था से जुड़ा हुआ ब्यूरो चीफ, पत्रकार या पदाधिकारी मान्य किया जाए।

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!