रिपोर्ट:नसरुद्दीन अंसारी

🔵ढखेरवा गांव से शारदा नगर स्थित श्री बालाजी मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए बाइक से निकले थे प्रेमी युगल

🔵युवती पक्ष के लोगों ने किया पीछा तो पहुंच गए घाघरा बैराज और नदी में छलांग लगाकर कर ली आत्महत्या

लखीमपुर खीरी।ढखेरवा गांव से प्रेम प्रसंग के चलते बुधवार को अपने घरों से लापता हुए एक प्रेमी युगल के जोड़े ने घाघरा बैराज के पास ठोकर बांध से नदी में छलांग लगाकर अपने प्रेम प्रसंग को लैला मजनू की तरह चौराहे में अपना इतिहास रच दिया है। गुरुवार दोपहर नदी से प्रेमी युवक का शव और प्रेमिका यु्वती का दुपट्टा बरामद होने के बाद जहां दोनों परिवारों में कोहराम मच गया तो वही घटना इलाके में आग की तरह फैल गई। मछुआरों को युवती का दुपट्टा नदी से मिलने के बाद आशंका है कि प्रेमी युगल के जोड़े ने एक साथ नदी में छलांग लगाकर अपने प्रेम प्रसंग की जीवन लीला ही समाप्त कर ली है।


पढ़ुआ थाना क्षेत्र के गांव ढखेरवा निवासी सरोज अवस्थी के पुत्र अभिषेक अवस्थी का पड़ोस के ही भारत भार्गव की पुत्री पूजा भार्गव के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। बुधवार सुबह अभिषेक अपनी बाइक से पूजा को लेकर गांव से फरार हो गया था। और दूसरे दिन गुरुवार दोपहर जनपद बहराइच के थाना सुजौली के अंतर्गत घाघरा बैराज के निकट ठोकर बांध के पास नदी से उसका शव बरामद हुआ है। बताते हैं कि जिस जगह से अभिषेक का शव बरामद हुआ है उससे कुछ ही दूरी पर तलाश कर रहे मछुआरों को युवती पूजा का दुपट्टा भी मिला है। और घटनास्थल से बाइक भी बरामद हो गई है। बाइक की डिग्गी से लड्डुओं के प्रसाद का डिब्बा पाया गया है। इससे परिजन अनुमान लगा रहे हैं कि युवक युवती घर से गायब होने के बाद पहले शारदा नगर स्थित श्री हनुमान मंदिर गए जहां दोनों ने प्रसाद चढ़ाने के उपरांत किसी डर से वापस घर ना जाकर ढखेरवा होते बहराइच मार्ग पर घाघरा बैराज पहुंचे और गांव में हुए शोर शराबा के बाद वह लोक लज्जा के डर से दोनों ने घाघरा नदी में छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। नदी में मछुआरों के द्वारा युवती के शव की तलाश जारी है।
उधर नवयुवती के पिता भारत भार्गव ने गुरुवार को पढुआ थाने में तहरीर देकर उक्त अभिषेक के विरुद्ध एनसीआर दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री को बहला फुसला कर अभिषेक अगवा कर ले गया है। इसके बाद से पुलिसकर्मी और दोनों के परिवारीजन खोजबीन में जुट गए थे। लेकिन गुरुवार दोपहर घाघरा बैराज से कुछ दूरी पर जनपद बहराइच के सुजौली थाना क्षेत्र के घाघरा नदी में युवक का उतराता हुआ कुछ लोगों ने शव देख पुलिस को सूचना दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। और शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दिया। उधर मछुआरों के द्वारा काफी तलाश के बावजूद भी युवती का शव नदी से बरामद नहीं हो सका है। नदी से युवती का सिर्फ दुपट्टा मिलने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!