रिपोर्ट:क्राइम ब्यूरो मनोज मिश्रा

🔵दशम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : ठहाकों से गूंजा गगन… योगमय हुआ मंडी परिसर।
🔵परिवहन मंत्री ने किया शुभारंभ, अफसरों एवं आमजन संग किया योगाभ्यास।
लखीमपुर खीरी 21 जून। शुक्रवार को खीरी में उत्साह, उल्लास, उमंग के साथ “योग स्वयं एवं समाज के लिए” थीम पर “दशम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2024” का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिला मुख्यालय पर कृषि उत्पादन मंडी समिति में बड़ी तादात में लोग शामिल हुए। इसी के साथ तहसील, ब्लाक व विभिन्न सरकारी व निजी संस्थानों में भी योग दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ हरवंश कुमार ने किया।

जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार परिवहन विभाग दयाशंकर सिंह, जनपदीय नोडल अधिकारी महानिदेशक (चिकित्सा शिक्षा) किंजल सिंह, विधायक श्रीनगर मंजू त्यागी, डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी गणेश प्रसाद साहा, आकांक्षा समिति अध्यक्ष अल्पना सिंह, सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी राममोहन गुप्ता ने किया।

परिवहन मंत्री ने नोडल अधिकारी, विधायक, डीएम-एसपी के साथ योग गतिविधियों से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों को तंबाकू और उसके अन्य उत्पादों से परहेज करने का संकल्प लिया। यह एक ऐसा मौका था, जब जनप्रतिनिधि, जिले भर के अधिकारी और आम नागरिकों ने एक साथ योगाभ्यास किया। इसमें जनपद के कुशल योग प्रशिक्षक कुलदीप वर्मा ने सामूहिक प्रार्थना के बाद कॉमन योग प्रोटोकॉल की ग्रीवा शक्ति, शक्ति एवं घुटना शक्ति विकासक क्रियाओं, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, उत्तान मंडूकासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन एवं सवासन सहित कपालभाति नाड़ी शोधन प्राणायाम शीतली प्राणायाम भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराते हुए प्रतिदिन योगाभ्यास का संकल्प दिलाया। शांति पाठ के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। योग प्रशिक्षक कुलदीप वर्मा के निर्देशन में योग प्रशिक्षक अमित कुमार व प्रिंस रंजन ने इन योगासन और प्राणायम का अभ्यास उपस्थित साधकों को कराया। साथ ही इन योगासनों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और निरोगीकाया के लिए इनके महत्व को रेखाकिंत किया।

योग से तन और मन रहता स्वस्थ, नियमित अभ्यास जरूरी : परिवहन मंत्री
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) परिवहन विभाग दयाशंकर सिंह ने कहा कि आज हम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दशम संस्करण को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मना रहे हैं। लखीमपुर जनपद में हम सब लोगों ने बहुत ही उत्साह के साथ इस योग दिवस में हिस्सा लिया। आज दुनियाभर में करोड़ों लोग ‘वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग’ पर एक साथ योग कर रहे हैं। योग से तन और मन स्वस्थ रहता है इसलिए इसका नियमित अभ्यास जरूरी है। योग भारत की ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जो मानसिक और आध्यात्मिक उन्नयन के साथ शरीर को भी स्वस्थ रखता है. आइए, ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ के निर्माण के लिए नियमित रूप से योग करने व अन्य लोगों को भी योग के प्रति जागरूक करने का संकल्प लें।

योग को बनाए जीवन का हिस्सा, अपनी दिनचर्या में करे शामिल : किंजल
जनपदीय नोडल अधिकारी महानिदेशक (चिकित्सा शिक्षा) किंजल सिंह ने सभी जनपदवासियों को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें तन और मन से फिट रहना है। लिहाजा योग जरूर करना चाहिए। कहा कि योग से तन और मन स्वस्थ रहता है। सभी लोग योग को जीवन का हिस्सा बनाकर अपनी दिनचर्या में शामिल करें। योग शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को समग्र प्रेरणा देता है।

स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए योग जरूरी : डीएम
डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए योग जरूरी है। अपील की कि अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाएं। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति के अंदर साहस, करुणा, दया, धैर्य जैसे गुण स्वयं आ जाते हैं, जो आत्म नियंत्रण की शक्ति प्रदान करते हैं। अंत में सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कार्यक्रम की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बताते हुए नोडल मंत्री, नोडल अधिकारी समेत योग में शामिल होने वाले सभी साधकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।

इनकी रही मौजूदगी :
कार्यक्रम में डीएम की धर्मपत्नी आकांक्षा समिति की अध्यक्ष श्रीमती अल्पना सिंह, एसपी की धर्मपत्नी डॉ कोमल साहा, सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एडीएम संजय सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ आर्य देशदीपक, सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता, एएसपी पवन गौतम, डीडीओ, पीडी, उपायुक्त उद्योग, बीएसए प्रवीण तिवारी, डीपीओ भारत प्रसाद, डीसी मनरेगा विपिन चौधरी, डीसी -एनआरएलएम राजेंद्र श्रीवास सहित विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय अधिकारी, कर्मचारी बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!