धर्मेन्द्र कसौधन(ब्यूरो, उत्तर प्रदेश):प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने के लिए सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में नियमित कम्प्यूटर शिक्षकों की भी नियुक्ति करने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने कम्प्यूटर शिक्षकों के पदसृजन के लिए भी माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा है। जिन स्कूलों में कम्प्यूटर विषय/शिक्षा की मान्यता (हाईस्कूल व इंटर की अलग-अलग) है और पढ़ाई हो रही है, उनकी सूची शासन को भेजी जा रही है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रदेशभर के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य की जाएगी। इसके लिए शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों से प्रस्ताव मांगा है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को 11 मई को पत्र लिखकर तय प्रारूप पर एक सप्ताह में सूचना मांगी है।

जिले में एडेड कॉलेजों का नाम, प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के सृजित पद, अनुपयोगी पदों का विषयवार विवरण, कम्प्यूटर विषय की मान्यता की स्थिति (हाईस्कूल या इंटर) और कॉलेज में कम्प्यूटर लैब स्थापित है या नहीं बिन्दुओं पर सूचना देनी है। इससे पहले सरकार ने एक दशक पहले सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी योजना के तहत कम्प्यूटर शिक्षा शुरू की थी। प्रत्येक स्कूल को 10-10 कम्प्यूटर देने के साथ निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स पर प्रतिमाह 15 हजार रुपये मानदेय पर कम्प्यूटर शिक्षक रखे गए थे। लेकिन पांच साल बाद पूरी योजना बंद हो गई। अधिकांश स्कूलों में कम्प्यूटर लैब पर चार-पांच साल से ताला पड़ा है। कुछ स्कूलों में प्राइवेट शिक्षक पढ़ा रहे हैं जिनको मानदेय बच्चों से लेकर दिया जाता है।

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