आकाश मिश्र बहुआयामी समाचार

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24OCT2024LMP001784

मोहम्मदी खीरी: केतकी का फूल अपने आंचल में खिलाने वाला मोहम्मदी महाभारत काल के पुरातन इतिहास का भी साक्षी है। ब्रिटिश शासन काल में जो जिले का दर्जा मिला हुआ था। जिला मुख्यालय से तकरीबन 60 किमी दूर शाहजहांपुर व हरदोई के बॉर्डर से लगी मोहम्मदी तहसील की ये टीस अब वहां के निवासियों की आवाज बनकर एक अभियान का रूप ले चुकी है।तकरीबन दस लाख की आबादी वाला मोहम्मदी तहसील क्षेत्र ब्रिटिश हुकूमत के दौरान जिला था, पर बाद में उससे ये दर्जा छिन गया। इसके बाद से ही समय-समय पर मोहम्मदी को फिर से जिला बनाए जाने की मांग उठती रही। पिछले कई सालों से इस मांग ने जोर पकड़ लिया है। विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान मोहम्मदी के मेला मैदान में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह के समर्थन में सभा करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए थे। उन्होंने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर मोहम्मदी को पुन: जिले का दर्जा दिलाने का भरोसा दिलाया था। इससे पहले भी मोहम्मदी को जिला बनाने का मामला चुनावी मुद्दा बनता रहा है लेकिन, सरकार का गठन होने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया गया।हर शनिवार को होता है प्रदर्शनमोहम्मदी को जिला बनाने की मांग को लेकर पिछले कई सालों से हर शनिवार को बार एसोसिएशन के नेतृत्व में तमाम संगठन रैली निकालकर प्रदर्शन करने के साथ ही ज्ञापन भी दे रहे हैं। इसमें बार एसोसिएशन सहित कौमी एकता कमेटी, व्यापार मंडल, प्रेस क्लब, श्री गुरुद्वारा कमेटी, किसान यूनियन, विद्यार्थी परिषद, मानवाधिकार संगठन, राष्ट्र रक्षक दल, गायत्री परिवार आदि तमाम अन्य संगठन वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।—–फैक्ट फाइलमोहम्मदी नगर की आबादी : 1,00000 लगभग तहसील क्षेत्र की आबादी : 10,00000 लगभग कुल मतदाता : 3,50,000 लगभगमहाविद्यालय : 12 लगभभविधि महाविद्यालय : 01इंटरमीडिएट कॉलेज : 25 लगभग आइटीआइ कॉलेज : 01 (सरकारी)पालीटेक्निक कालेज: 01 (सरकारी)आंख अस्पताल : डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटलसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : 02 (मोहम्मदी, पसगवां)चीनी मिल : 02 (कुंभी व अजबापुर)रोडवेज बस अड्डा : 01विकास खंड : 02 (मोहम्मदी, पसगवां)नगर निकाय:- 2 (मोहम्मदी नगर पालिका’; बरवर नगर पंचायत)कोतवाली : 02 (मोहम्मदी, पसगवां)थाना। :- (उचौलिया)एडीजे कोर्ट : हैकिसान मंडी : है#मोहम्मदी_नगर #मोहम्मदी_खीरी #विधानसभा144

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!