बिजनौर जनपद के DIOS कार्यालय के बाबू देवेंद्र सिंह चौहान को एंटी करप्शन मुरादाबाद की टीम ने दस हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ने के बाद से डीआईओएस कार्यालय में हड़कंप मचा गया।

शिकायतकर्ता राधेश्याम ने कहा कि देवेंद्र कुमार की प्रबंधक से मिलीभगत थी और दवाब बनाकर मानसिक प्रताड़ित कर रहे थे। बताया कि देवेन्द्र कुमार 80 हजार किस्तों के रूप में ले चुके और 50 हजार की मांग कर रहे थे। गुरुवार को दस हजार रुपये देने थे। जिसके बाद एंटी करप्शन मुरादाबाद की टीम का दरवाजा खटखटाया। उनके कार्यालय में गया और दस हजार रुपये दे दिए। 500-500 के नोट थे। जैसे ही वह गिन रहे थे टीम ने आकर उन्हें दबोच लिया।

इस मामले में धरा गया बाबू: राधेयश्याम आर्य कन्या इंटर कालेज नजीबाबाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। 20 अप्रैल 2022 को प्रबंधक और प्रधानाचार्य ने झूठे आरोप लगाकर सस्पेंड करा दिया था। इसी के सम्बंध में पूर्व डीआईओएस ने जांच करा कर वेतन बहाली के आदेश कर दिए थे। जिसे लेकर मैनेजमेंट कोर्ट चला गया। इसके बाद कोर्ट ने डीआईओएस को आदेशित किया कि प्रकरण को पुन: संज्ञान में लेकर इनकी मदद की जाए तो डीआईओएस ने मेरे पक्ष में आदेश कर दिया।जब आदेश लेकर कार्यभार ग्रहण करने के लिए उपस्थित हुआ तो भी ज्वाइन नहीं कराया और मैनेजमेंट दोबारा कोर्ट चले गए। वेतन बहाली और ज्वाइन कराने के नाम पर बाबू देवेंद्र सिंह चौहान रिश्वत की मांग कर रहे थे।

DIOS साहब से तो बात करा दो

टीम ने जब बीएसए कार्यालय पर पहुंचकर प्रधान सहायक देवेन्द्र सिंह चौहान को रिश्वत लेते पकड़ा तो वह रोने लगा। रोते हुए कहा कि साहब से तो बात करा दो। वह एंटी करप्शन टीम की गाड़ी में बैठने से पहले डीआईओएस से बात करने के लिए मान मनोव्वल कर रहा था, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी।

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