रिंकू शर्मा स्वतंत्र पत्रकार अलीगढ़
आप कुछ भी कहते रहिए कि मीडिया बिक गई है। घर बैठकर जितनी उपमाएं दे सकते हैं दीजिए। पर एक बात सही है कि यही पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर आपके लिए हिस्ट्रीशीटर से टकराते हैं। भ्रष्टाचारियों से टकराते हैं। घोटालेबाजों से टकराते हैं। आप अंदाजा लगाएं कि सीतापुर में एक खबर लिखने पर पत्रकार को गोली मार दी गई। इसके पहले भी कई घटनाएं हुई। कहीं कोई स्वर सुनाई नहीं दिया। दलित और मुस्लिम और महिला हितों पर सोशल मीडिया पर अपना ज्ञान देने वाले आज चुप हैं। क्योंकि पत्रकार किसी का वोट बैंक नहीं है। क्योंकि पत्रकार ठेकेदारों को पल भर में अपनी कलम की ताकत से ठेंगा दिखा देता है। आप सहजता से आरोप लगा सकते हैं कि पत्रकार कुछ पैसे में बिक जाते हैं, यह कहना आसान है लेकिन यकीन मानिए यही पत्रकार जब सिस्टम में अंदर बैठे भ्रष्टाचार को उधेड़ना शुरू करते हैं तो गंद सामने आ जाती है। आज आप कुछ न बोलिए नेताओं के जयकारे लगाइए, पत्रकारों को गाली दीजिए। पर एक बात मान लीजिए अगर ये कौम खत्म हों गई तो आपको बहरा, गूंगा और अंधा बना दिया जाएगा। आप सिर्फ देखते रहेंगे और कुछ नहीं कर पाएंगे। इसलिए आप जिस भी शहर में हैं, जिस गांव कस्बे में हैं। पत्रकारों के लिए हितों के आवाज उठाएं। एक मानव श्रृंखला बनाकर ये दिखाइए कि सच की आवाज के साथ जनता खड़ी है। इससे पत्रकारों को कुछ नहीं बस संबल मिलेगा। आपका साथ उनके हाथों को और मजबूत करेगा।
सीतापुर के कातिल को फांसी तक पहुंचाने के लिए आवाज उठाइए। क्योंकि समवेत तरीके से उभरते स्वर तस्वीर बदलते हैं।
बाकी आपकी इच्छा है, आप कैसे देश का निर्माण करना चाहते हैं और हां इस पर सियासत बिल्कुल न करिए। क्योंकि पार्टी कोई भी हो एक न एक दिन वो सत्ता में आएगी जरूर। इसलिए सिविल सोसायटी को स्ट्रांग बनाना पड़ेगा। साथ आइए हत्यारों के खिलाफ आवाज उठाइए।

