संजय बुक डिपो की दंगाई, शिक्षा माफियाओं में पकड़ किताबों पर निर्धारित मूल्य से ज्यादा वसूलते है कीमत ।

बदायूँ।दुकान पर आने वाले ग्राहक को भगवान का रूप कहा जाता है और पैसे कमाने में बदनाम हो चुके धरती के भगवान चाहे जैसे हो पर ग्राहक को देवता जैसा सम्मान देते नजर आ आते हैं लेकिन बच्चों का भविष्य बनाने के नाम पर लूट खसोट मचवा रहे शिक्षा माफिया शायद वर्तमान में धरती के शैतान बन गए हैं। मिलने वाली तमाम शिकायतों से तो ऐसा ही लग रहा है कि स्कूल संचालकों के साथ बदायं में कापी किताबें बेचने वाले पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं और किताबों की कीमत वसूलने के बाद वह कब किस ग्राहक से मारपीट पर उतारू हो जाये किसी को नहीं पता।

ताजा मामला बदायूं शहर में पुरानी चुंगी टिकट गंज के संजय बुक डिपो का है जिनको लेकर ग्राहकों से मनमानी करने और ग्राहको से दबंगई दिखाने का आरोप लगा है और मारपीट पर उतारू होने का यह मामला कापी किताबो पर लिखे निर्धारित मूल्य को लेकर होता तो समझ में आ सकता था। क्योंकि स्कूल संचालकों को मोटी – रकम का भुगतान दुकानदार को ग्राहक से वसूले जाने वाली रकम में करना है और वह दुकानदार की मजबूरी हो सकती है लेकिन किताब को बदलने के लिए संजय बुक डिपों के संचालक ग्राहक से मारपीट पर उतारू हो जाए यह बात गलत लग रही है। राजनीति में अपनी पकड बताने वाले पुस्तक बिक्रेता यह क्यों भूल जाते हैं कि जब उपर वाले की लाठी चलेगी तो राजनीति और राजगददी कुछ काम नहीं कर पाएगी। ग्राहक किसी का नहीं होता मजबूरी में आता है इस भावना को लेकर कारोबार करने वालों की नाव कब डूब जाए इसका जवाब किसी के पास नहीं होता।

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