रिपोर्टर jay praksh singh
MD News Aligarh


जिंदगी के सफर में तमाम अच्छा व बुरा पड़ाव आता हैं गुजर जाता है मगर सफर रुकता नहीं हौसला बुलन्द हो तो एक दिन मंजिल मिल ही जाती है। मगर अफसोस उस दौर में उन रिश्तों की कलई उतर जाती है जिनके दम्भ में गुमान का स्तम्भ खडा कर लिया होता है आदमी! समय का यह शतरंजी खेल जो झेल लिया वो कहीं फेल नहीं हुआ। यह आनी जानी दुनियां है। उतार चढाव लगाव विलगाव का घाव बनता बिगड़ता रहता है।बस पहचान का आवरण रह रह कर उतरता रहता है। इस मायावी लोक में जीवन की जीवंतता आत्मा की आत्मीयता के साथ ही सम्बन्धों की सरलता पर ही कायम है उसमें अगर कटुता ने निकटता बना लिया तब सब कुछ बदल जाता है। सांसों का सरगम जब है तभी तक इस बेरहम जालिम जमाने में अहम का वहम जिन्दा है।पल पल गुजरता उम्र का कारवां निर्धारित अवधि से निकलता जा रहा है हर रोज प्रारब्ध के पारितोषिक में मिला जीवन मंजिल के तरफ सरकता जा रहा है फिर भी इस कायनाती आभा मंडल में गुरूर व घमंड का प्रचंड बेग इन्सानियत के बाग को रौंद रहा है। यह सभी को पता है घमंड किसी का हमेशा नहीं रहता है कैलेण्डर हमेशा तारीख बदलता है पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है जो कैलेण्डर को ही बदल देती है।इस मृत्युलोक में आत्मा का मिट्टी की काया में आगमन यूं ही नहीं होता इसके पीछे भी प्रारब्धीय खेल है जो कर्मों की श्रंखलाबद्ध कहानी से जुड़े किरदारो से मिलन के लिए पूर्व निर्धारित होता है।हर कोई अपने कर्मफल को ही इस मायावी लोक में भोगता है‌।इस लोक में आत्मा वहीं पाती है जो पूर्व जन्मों में बो चुकी होती है। मिलना बिछड़ना भी उसी खेल का हिस्सा है वर्ना हर कोई अकेला है न आने का पता है न जाने का पता है न अपने का पता है न पराए का पता है हर कोइ किराएदार है एक दिन छोड़कर सभी को जाना है। रंग बदलती दुनिया में खलबली मची है परिवर्तन की पराकाष्ठा पर वर्तमान मुस्करा रहा है! मतलब परस्ती का बोल बाला है चेहरे पर चमक मगर दिल सभी का काला है। रिश्तों में कड़वाहट है,! सम्बन्धों में मिलावट है! सिसक रहा है आदमी बदल रहा रहा सभी का व्यवहार है।कोई अपना नही हर तरफ केवल स्वार्थ का व्यापार है।एक दिन अन्त सभी का होना है फिर काहे का घमंड!!
सबका मालिक एक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed